Tuesday, July 21, 2026

Bihar में Women’s Voice देगा महिलाओं को आवाज़

Desk: कुछ चीजें कागजों पर बहुत बेहतरीन दिखती हैं. जैसे भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a). आधिकारिक तौर पर तो ये भारत के हर नागरिक को बोलने पढ़ने हसने गाने या फिर अपने मानवाच्छित काम जिससे कि किसी दूसरे या राष्ट्र को कोई हानि ना हो, करने की आजादी देता है. ध्यान से सुनिएगा, भारत के हर नागरिक को. इस आर्टिकल का खास बात ये है कि ये महिला और पुरुष के पैमाने से ऊपर है. मतलब कि इस आर्टिकल ने महिला और पुरुषों के बराबर के और एक समान अधिकार दिए हैं. मोटे मोटे तौर पर देखा जाए तो भारतीय संविधान में कहीं भी महिला और पुरूस में भेद नहीं किया गया है. लेकिन हमने जैसा कहा कि जो चीज़ कागज पर अच्छी दिखती है, उसे धरातल पर नहीं उतरने दिया जाता. इस आर्टिकल के साथ भी ऐसा ही है.

अनुच्छेद 19(1)(a), कागज पर आजादी, हकीकत में चुनौतियां

ये आर्टिकल महिलाओं को भी, बोलने हसने, रहने का अधिकार देता है. लेकिन फिर भी महिलाओं पर हो रहा अत्याचार आम तौर पर कहीं ना कहीं देखने को मिल जाता है. घूँघट प्रथा हमारे देश में आज भी है. हाँ, कहीं कहीं ये संस्कारों का हिस्सा है जिसपर हमें कोई टिप्पणी नहीं करनी लेकिन कहीं कहीं मामला जबरदस्ती का भी है. जो की ठीक नहीं. ठीक तो ये भी नहीं है कि महिलाओं को बोलने से रोका जाए, ख़ुद के विचारों को जाहिर करने से रोका जाए. संविधान का ये अनुच्छेद 19(1)(a) इस बात की घोर निंदा भी करता है. लेकिन भारत इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि कोई देश सिर्फ़ कानूनी किताब के पन्नों पर नहीं चल सकता.

संविधान का वादा, हर नागरिक को बोलने की आजादी

शायद इसी बात को समझ बिहार की महिला राज्य आयोग आज एक कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है. जिसके तहत महिलाओं को बोलने की आजादी दी जाएगी. इस प्रोग्राम का नाम वुमेंस वॉइस रखा गया है. बताया जा रहा है कि यह प्रोग्राम नवरात्रि के समापन यानी कि दशहरा के बाद से शुरू किया जाएगा. आइए अब ये भी जान लेते हैं कि इस प्रोग्राम के तहत क्या क्या चीजे होने वाली हैं. तो, इस प्रोग्राम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर कैंप लगाया जाएगा, जहां पर महिलाएं आकर अपनी बातें रख सकती हैं। शुरुआत में यह कॉलेज में होगा, उसके बाद झुग्गी-झोपड़ियां में भी कैंप का आयोजन होगा। पटना से इसकी शुरुआत होगी और उसके बाद बिहार के विभिन्न जिलों में भी इस कार्यक्रम का आयोजन होगा।

महिलाओं पर अत्याचार, कागज से परे हकीकत

अब इस पूरे कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने कहा कि, हम लोग ‘वूमेंस वॉइस’ लेकर आ रहे हैं। संविधान ने बोलने की आजादी तो दिया है, लेकिन महिलाएं बोल नहीं पाती हैं। बहुत सारी ऐसी बातें चाहे वो पर्सनल इशू हो, चाहे स्वास्थ्य को लेकर हो, चाहे आर्थिक ही हो, बहुत सारा मैटर है, जिसे महिलाएं खुलकर नहीं बोल सकती है।ऐसे में महिला आयोग एक मंच लेकर के आ रही है, जो की वूमेंस वॉइस है, जिसके साथ महिलाएं खुलकर बोलेंगी। यह मंच महिलाओं को बोलने की आजादी देगा।

घूंघट प्रथा और रूढ़िवादिता, आजादी पर सवाल

अप्सरा मिश्रा ने बताया कि, वैसी महिलाए जो काम काजी हैं, जिनका एक प्रोफेशनल लाइफ भी है. जो अपने पैरों पर खड़ी हैं, सशक्त भी हैं लेकिन फिर भी उनके जीवम में कुछ ऐसे पहलू हैं जिनपर वो खुल के बात नहीं कर पाती, वुमन्स वॉइस ऐसी महिलाओं के लिए भी अपनी बात रखने का एक ज़रिया बनेगा. महिलाओं को लेकर गाँव में जो मान्यताएं हैं, जो रूढ़िवादी सोच वर्षों से अलथी पलथी मार ख़ुद को एकदम से टिकाए बैठी है, अप्सरा ने उस पर चोट करते हुए कहा कि, ग्रामीण इलाकों में ऐसा कहा जाता है कि लड़की हो इतना जोर से मत हंसो। संस्कार के नाम पर रूढ़ीवादिता है। इसीलिए हम महिलाओं को यह मंच देना चाहते हैं। इस दौरान अगर हमें कुछ ऐसे केस दिखे, जिसे रजिस्टर करना है तो हम महिलाओं के केस भी लेंगे।

वुमन्स वॉइस, बिहार महिला आयोग की नई पहल

अब ये तो बात हो गई की ये कार्यक्रम क्या है कहा होगा कैसे होगा. लेकिन असल सवाल ये है कि ये कार्यक्रम सफल कितना होगा. क्योंकि ये भी अभी बस कागजों और बातों का ही हिस्सा है, ज़मीन पर उतरना अभी बाक़ी है. जिसमें दशहरा तक का इंतज़ार है. अब इंतज़ार की घड़ी जब ख़त्म होगी तभी तस्वीर भी साफ़ होगा. तब टीके आप देखते रहिए एयर नाउ

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