देश : देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आखिरी तारीख बढ़ा दी गई है। पहले यह डेडलाइन 4 दिसंबर थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब कई जगहों से बीएलओ (BLO) पर अत्यधिक काम का दबाव होने की शिकायतें आ रही थीं। कुछ राज्यों में BLO के आत्महत्या के मामले सामने आने के बाद भी दबाव को लेकर गंभीर चर्चा चल रही थी।
Highlights:
क्या है SIR प्रक्रिया?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। इसमें नए वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं, मृत व्यक्तियों या दूसरी जगह शिफ्ट हुए लोगों के नाम हटाए जाते हैं, नाम और पते में हुई गलतियां ठीक की जाती हैं और BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं। यह प्रक्रिया 28 अक्टूबर से शुरू हुई थी।
कौन-कौन से राज्यों में हो रहा है SIR?
12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं जहां यह प्रक्रिया चल रही है जैसे अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल। खास बात यह है कि अगले साल चुनाव वाले पश्चिम बंगाल में SIR होगा, लेकिन असम में नहीं। चुनाव आयोग के अनुसार असम की नागरिकता से जुड़े नियम अलग हैं, इसलिए वहां यह प्रक्रिया अलग तरीके से पूरी की जाएगी। SIR का पहला चरण बिहार में पूरा हो चुका है। बिहार में तैयार अंतिम मतदाता सूची में 7.42 करोड़ वोटर जोड़े गए हैं, जो 6 और 11 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालेंगे।
कितने वोटर और कितने कर्मचारी लगे हैं?
SIR वाले सभी राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता हैं। इस बड़े काम के लिए 5.33 लाख BLO (बूथ स्तर अधिकारी) 7 लाख से अधिक BLA (पार्टियों के प्रतिनिधि) तैनात किए गए हैं। ये कर्मचारी घर-घर जाकर वोटरों से मिल रहे हैं और फॉर्म भरवाकर जानकारी को मैच करवा रहे हैं।
SIR के दौरान वोटर को क्या करना होगा?
SIR प्रक्रिया में BLO और BLA वोटरों को फॉर्म उपलब्ध कराते हैं। इसमें वोटर को अपनी जानकारी मिलान करनी होती है। गलतियों को ठीक कराने के लिए फॉर्म भरना होता है। अगर दो जगह नाम है तो एक जगह से कटवाना होता है। अगर नाम सूची में नहीं है तो जोड़ने के लिए दस्तावेज देने होते हैं जैसे – आधार कार्ड, पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, पेंशनर पहचान पत्र, सरकारी विभाग का पहचान पत्र, 10वीं की मार्कशीट, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, बने घर/जमीन का आवंटन पत्र, परिवार रजिस्टर में नाम, वनाधिकार प्रमाणपत्र और NRC में दर्ज नाम। इन दस्तावेजों के आधार पर नाम जोड़ा या सुधारा जा सकता है।
SIR क्यों जरूरी है?
चुनाव आयोग के अनुसार SIR प्रक्रिया 1951 से 2004 तक नियमित रूप से होती रही, लेकिन पिछले 21 साल से यह पूरी तरह नहीं हो पाई। इतने लंबे अंतराल में मतदाता सूची में कई बदलाव होने जरूरी हैं, जैसे- लोगों का दूसरे शहरों में माइग्रेशन, मृत व्यक्तियों के नाम लिस्ट में बने रहना, दो जगह वोटर सूची में नाम होना, विदेशी नागरिकों के नाम गलती से दर्ज हो जाना और नए 18+ वोटरों का नाम छूट जाना। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी योग्य वोटर लिस्ट से न छूटे और कोई अयोग्य नाम शामिल न हो।
चुनाव आयोग क्यों बढ़ा रहा है डेडलाइन?
कई राज्यों में BLO पर अत्यधिक कार्यभार की शिकायतें मिल रही थीं। कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में BLO की आत्महत्या के मामले सामने आने से यह मुद्दा संवेदनशील हो गया था। ऐसे माहौल में आयोग ने डेडलाइन बढ़ाकर कर्मचारियों पर दबाव कम करने का प्रयास किया है, ताकि प्रक्रिया सही तरीके से और वक्त पर पूरी हो सके।


