Sunday, November 1, 2026

Virtual Autopsy: मुंबई के KEM अस्पताल में बिना चीर-फाड़ होगा पोस्टमार्टम, सिर्फ 10 मिनट में मिलेगी रिपोर्ट जैसी जांच

महाराष्ट्र: मुंबई में अब पोस्टमार्टम करने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है. Virtual Autopsy की मदद से अब बिना शरीर को चीर-फाड़ किए ही मौत की वजह पता लगाई जा सकेगी. यह नई सुविधा मुंबई के परेल स्थित KEM अस्पताल में शुरू होने जा रही है. यहां CT स्कैन और 3D तस्वीरों की मदद से शरीर के अंदर क्या हुआ, यह सिर्फ कुछ मिनटों में देखा जा सकेगा.

इससे डॉक्टरों के साथ-साथ पुलिस का काम भी पहले से काफी आसान हो सकता है. अभी तक पोस्टमार्टम के लिए शरीर को खोलकर जांच करनी पड़ती है. इसमें कई घंटे लग जाते हैं. लेकिन नई तकनीक आने के बाद कई मामलों में कम समय में ही जरूरी जानकारी मिल सकेगी. यही वजह है कि KEM अस्पताल का यह प्रोजेक्ट काफी चर्चा में है.

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Virtual Autopsy क्या है

अगर आसान भाषा में समझें तो Virtual Autopsy ऐसा पोस्टमार्टम है जिसमें शरीर को काटने की जरूरत नहीं पड़ती. इसकी जगह CT स्कैन और 3D इमेजिंग मशीन का इस्तेमाल किया जाता है. मशीन शरीर के अंदर की बहुत साफ तस्वीरें तैयार करती है. इन तस्वीरों को देखकर डॉक्टर समझ सकते हैं कि चोट कहां लगी, कितनी गहरी है, कोई हड्डी टूटी है या नहीं और मौत की वजह क्या हो सकती है. कई बार सड़क हादसे, गोली लगने या चाकू से हमले जैसे मामलों में शरीर के अंदर की चोटें बाहर से दिखाई नहीं देतीं. ऐसे मामलों में यह तकनीक काफी काम आएगी.

KEM में बनेगा Virtual Autopsy सेंटर

BMC यानी Brihanmumbai Municipal Corporation ने 30 अक्टूबर को करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से नया मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए टेंडर जारी किया है. यह इमारत ग्राउंड फ्लोर के अलावा पांच मंजिला होगी. इस नए कॉम्प्लेक्स की सबसे बड़ी खासियत Virtual Autopsy सेंटर होगा. यहां बिना शरीर को काटे पोस्टमार्टम किया जा सकेगा. महाराष्ट्र में यह अपनी तरह का पहला सेंटर होगा. अगर यह सफल रहता है, तो आगे दूसरे सरकारी अस्पतालों में भी ऐसी सुविधा शुरू की जा सकती है. मुंबई के JJ अस्पताल में भी इसी तरह का सेंटर बनाने की योजना है.

Virtual Autopsy: इसकी जरूरत क्यों पड़ी

समय के साथ मेडिकल टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है. अब कोशिश यह है कि ज्यादा से ज्यादा काम मशीनों की मदद से जल्दी और आसान तरीके से हो सके. पोस्टमार्टम में भी यही बदलाव देखने को मिल रहा है. पुराने तरीके से पोस्टमार्टम करने में चार से छह घंटे तक का समय लग सकता है.

वहीं Virtual Autopsy में कुछ ही मिनटों में शरीर के अंदर की तस्वीरें सामने आ जाती हैं. इससे डॉक्टरों को यह समझने में आसानी होती है कि मौत कैसे हुई और शरीर के किस हिस्से में चोट लगी. खासकर गोली लगने, चाकू से हमला होने, सड़क हादसे या दूसरे संदिग्ध मामलों में यह तकनीक काफी मददगार साबित हो सकती है. इससे पुलिस को भी जांच आगे बढ़ाने में आसानी होगी.

AIIMS में पहले से इस्तेमाल हो रही यह तकनीक

भारत में Virtual Autopsy कोई बिल्कुल नई चीज नहीं है. इसकी शुरुआत सबसे पहले मार्च 2021 में दिल्ली के AIIMS में हुई थी. इसे वर्टोप्सी के नाम से भी जाना जाता है. AIIMS की रिसर्च के मुताबिक वहां लगा CT स्कैनर कुछ ही सेकंड में शरीर की करीब 25 हजार तस्वीरें ले सकता है. इन तस्वीरों की मदद से पूरी जांच करीब 10 मिनट में पूरी हो जाती है. वहीं पुराने तरीके से पोस्टमार्टम करने में चार से छह घंटे तक लग सकते हैं. यही वजह है कि अब दूसरे बड़े सरकारी अस्पताल भी इस तकनीक को अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.

डॉक्टरों और पुलिस, दोनों को मिलेगा फायदा

Virtual Autopsy सिर्फ डॉक्टरों के लिए ही नहीं, बल्कि पुलिस के लिए भी काफी फायदेमंद हो सकती है. किसी भी संदिग्ध मौत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे अहम सबूतों में से एक होती है. अगर रिपोर्ट जल्दी तैयार होगी, तो जांच भी तेजी से आगे बढ़ सकेगी. इसके अलावा शरीर के अंदर की 3D तस्वीरें रिकॉर्ड के तौर पर सुरक्षित रखी जा सकती हैं. जरूरत पड़ने पर इन्हें बाद में भी देखा जा सकता है. इससे कई मामलों में जांच और कोर्ट की कार्रवाई के दौरान भी मदद मिल सकती है.

Virtual Autopsy: कब तक शुरू हो जाएगा यह सेंटर

KEM अस्पताल का यह प्रोजेक्ट टर्नकी आधार पर पूरा किया जाएगा. इसके लिए 5 नवंबर को प्री-टेंडर मीटिंग रखी गई है. वहीं कंपनियां 19 नवंबर तक अपनी बोलियां जमा कर सकेंगी. अस्पताल के डीन डॉ. हरीश पाठक ने बताया है कि टेंडर फाइनल होने के बाद करीब 11 महीने के भीतर यह पूरा प्रोजेक्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.

अगर सब कुछ तय समय के मुताबिक हुआ, तो अगले साल मुंबई में ऐसा हाई-टेक पोस्टमार्टम सेंटर होगा जहां बिना शरीर को चीर-फाड़ किए सिर्फ 10 मिनट में जांच पूरी की जा सकेगी. इससे पोस्टमार्टम का तरीका पहले से ज्यादा तेज, आसान और आधुनिक हो जाएगा. आने वाले समय में यह तकनीक देश के दूसरे बड़े सरकारी अस्पतालों में भी देखने को मिल सकती है.

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एयर नाऊ स्पेशल

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