वाराणसी: वाराणसी में शनिवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान को किसानों के विरोध के चलते प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में छोड़कर बाहर जाना पड़ा। किसान काशी द्वार आवासीय योजना के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर नाराज थे और उन्होंने सीधे मंत्री से सवाल-जवाब शुरू कर दिया। केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान 1 फरवरी को पेश हुए मोदी सरकार के बजट पर चर्चा के लिए वाराणसी के सर्किट हाउस पहुंचे थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होते ही पिंडरा तहसील क्षेत्र के किसानों ने विरोध शुरू कर दिया और जमकर नारेबाजी की।
Highlights:
मुआवजे को लेकर किसानों ने उठाए सवाल
किसानों का कहना था कि काशी द्वार आवासीय योजना के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन इसके बदले उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा। किसानों ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपए मूल्य की जमीन का मुआवजा लाखों में तय किया जा रहा है। विरोध कर रहे किसान मंच के पास पहुंच गए और केंद्रीय मंत्री को घेर लिया। इस दौरान किसानों और मंत्री के बीच तीखी बहस भी हुई। काफी देर तक हंगामा चलता रहा, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
हालात बिगड़ने पर मंत्री ने छोड़ा मंच
स्थिति बिगड़ती देख केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान मंच से उतर गए और प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर बाहर चले गए। मंत्री के जाने के बाद भी किसान शांत नहीं हुए और नारेबाजी जारी रही। हंगामे की सूचना मिलने पर स्थानीय नेताओं ने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे 10 किसानों को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित हुई। किसानों ने बताया कि सरकार पिंडरा तहसील क्षेत्र के 10 गांवों की 800 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित करना चाहती है। इस जमीन पर काशी द्वार आवासीय योजना के तहत हाईटेक कॉलोनी विकसित की जानी है।
विरोध से काम रुका
आवास विकास परिषद द्वारा 10 में से 7 गांवों में सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है, जबकि 3 गांवों में किसानों के विरोध के कारण सर्वे और आगे की प्रक्रिया रुकी हुई है। किसानों का कहना है कि जिला प्रशासन ने सर्किल रेट नहीं बढ़ाया है और जमीन की रजिस्ट्री भी रोक दी गई है। किसानों ने चिंता जताई कि खेत छिन जाने के बाद उनकी आजीविका खत्म हो जाएगी। उचित मुआवजा नहीं मिलने से वे दूसरी जमीन भी नहीं खरीद पा रहे हैं। किसान उचित मूल्य पर मुआवजा देने और सर्किल रेट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


