पटना : बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाला के एक मामले में मंगलवार को पटना की एक विशेष अदालत में पहला फैसला हुआ. इसमें एक बैंक प्रबंधक समेत तीन लोगों को चार वर्षों तक के सश्रम कारावास की सजा के साथ 14 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया है.
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सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश सुनील कुमार ने फैसला सुनाते हुए भागलपुर स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक के पूर्व सहायक प्रबंधक राकेश कुमार, लिपिक अजय पांडे व भागलपुर समाहरणालय के तत्कालीन प्रधान नाजिर अमरेंद्र यादव को दोषी करार दिया.
मामला भागलपुर में महिला सशक्तीकरण व सुदृढ़ीकरण की सरकारी योजनाओं की करोड़ों रुपयों की राशि अपराधिक षड्यंत्र तथा सरकारी कर्मचारी की मिलीभगत से सृजन नामक संस्था के माध्यम से जालसाजी पूर्वक गबन करने का है.
किसको कितनी सजा
दोषी प्रधान नाजिर को चार वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ 14 लाख का जुर्माना. जुर्माना नहीं देने पर दो वर्ष के कारावास की सजा अलग से.
दोषी सहायक बैंक प्रबंधक को तीन वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ 475000 का जुर्माना. जुर्माना नहीं देने पर 1.4 वर्ष की सजा अलग से
बैंक लिपिक को तीन वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ 625000 रुपए का जुर्माना. जुर्माना नहीं देने पर दो वर्ष चार महीने की सजा अलग से.


