रांची: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शुक्रवार को झारखण्ड के राज्यपाल के रूप में अपने दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर लिया। इस मौके पर राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों समेत अन्य गणमान्य अतिथियों ने लोक भवन पहुंचकर उन्हें शुभकामनाएं व बधाई दी। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि झारखण्ड की महान संस्कृति, समृद्ध जनजातीय विरासत, प्राकृतिक संपदा तथा यहाँ के परिश्रमी एवं सरल लोगों के बीच कार्य करना उनके सार्वजनिक जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं आत्मीय अनुभव रहा है।
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सार्वजनिक जीवन का नया अध्याय
राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2024 में झारखण्ड की सेवा का अवसर प्राप्त होना उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया एवं महत्वपूर्ण अध्याय था, जिसका निर्वहन उन्होंने पूर्ण निष्ठा, समर्पण तथा संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप करने का सतत प्रयास किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद केवल एक संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि जनता के विश्वास एवं आकांक्षाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। इसी भावना के साथ उन्होंने अपने कार्यकाल में राज्य के विकास, शिक्षा, युवाओं, किसानों, महिलाओं तथा वंचित एवं कमजोर वर्गों के हितों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी।
राज्यपाल ने झारखण्ड की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, फूलो-झानो, नीलाम्बर-पीताम्बर, ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव सहित राज्य के सभी अमर सेनानियों एवं महान विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि इन महान विभूतियों के आदर्श आज भी समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं।
प्रत्यक्ष संवाद का अवसर
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान उन्हें राज्य के विभिन्न जिलों, ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों का व्यापक भ्रमण करने तथा समाज के विविध वर्गों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया तथा झारखण्ड के लोगों की सरलता, परिश्रमशीलता और आत्मीयता को निकट से अनुभव किया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण की सराहना करते हुए कहा कि विकास की दिशा में अभी भी सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
जनता के साथ संवाद
राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने लोक भवन को केवल एक संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्था के रूप में नहीं, बल्कि जनता के साथ संवाद, विश्वास एवं सहभागिता के एक प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने का प्रयास किया। समाज के विभिन्न वर्गों शिक्षाविदों, किसानों, युवाओं, सामाजिक संगठनों एवं बुद्धिजीवियों के साथ नियमित संवाद का क्रम निरंतर बना रहा तथा आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान हेतु लोक भवन के द्वार सदैव खुले रहे।
राज्यपाल ने राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका विशेष ध्यान उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य तथा विश्वविद्यालयों में उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण के निर्माण पर केंद्रित रहा। उन्होंने सभी कुलपतियों एवं शिक्षकों से झारखण्ड को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय उत्कृष्टता का केंद्र बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारा देश ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है तथा प्राकृतिक संसाधनों, जनजातीय विरासत और युवा शक्ति से समृद्ध झारखण्ड इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों एवं प्रत्येक नागरिक से विकास के इस संकल्प को साकार करने में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने राज्यहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्राप्त सहयोग के लिए राज्य सरकार के प्रति भी आभार व्यक्त किया तथा विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार का सकारात्मक सहयोग भविष्य में भी जनहित एवं विकास कार्यों को नई गति प्रदान करता रहेगा।
इस मौके पर राज्यपाल के दो वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख गतिविधियों, जनसेवा के विविध आयामों तथा झारखण्ड के साथ उनके आत्मीय जुड़ाव को समाहित करने वाले प्रकाशन “संवाद से विश्वास” का लोकार्पण भी किया गया।


