नई दिल्ली: बीआईटी मेसरा में मारपीट के बाद एक छात्र की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संस्थान को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए बीआईटी मेसरा को मृतक छात्र के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
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कब हुआ था विवाद
यह मामला 14 नवंबर 2024 का है। जब बीआईटी मेसरा परिसर में फ्रेशर पार्टी का आयोजन किया था। पार्टी के दौरान कुछ छात्रों के बीच विवाद हो गया, जो बाद में मारपीट में बदल गया। बताया गया कि इस दौरान कुछ छात्रों ने मिलकर राजा पासवान नामक छात्र के साथ गंभीर मारपीट की। जिसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गई।
गंभीर चोटों के थे निशान
मृतक छात्र राजा पासवान के पिता चंदन पासवान के अनुसार उनके बेटे के शरीर पर लाठी, डंडे और बेल्ट से मारपीट के निशान थे। गंभीर हालत में उसे रिम्स में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने बीआईटी मेसरा को मृतक छात्र के परिवार को 20 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया था। साथ ही अदालत ने राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए झारखंड के डीजीपी को ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का भी निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट का फैसले बरकरार
झारखंड हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ बीआईटी मेसरा ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया और मुआवजे का आदेश बरकरार रखा। संस्थान ने मुआवजा देने के लिए कुछ समय की मांग की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह का समय दिया है।


