Monday, April 20, 2026

आधी आबादी को सिर्फ नारों तक ही सीमित रखना चाहता है विपक्ष, महिला आरक्षण कानून इसका उदाहरण : श्रेयसी सिंह

रांची: बिहार की पूर्व मंत्री सह बिहार से जमुई की विधायक श्रेयसी सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने दो दिनों का स्पेशल सत्र बुलाकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पुनः पारित कराने का प्रयास किया लेकिन आधी आबादी का झूठा नारा लगाने वाले लोगों ने इस अधिनियम को कानून बनाने के लिए वोटिंग तक नहीं किया।

यह वह लोग हैं जो महिलाओं को केवल दिग्भ्रमित करना चाहते हैं और ये विपक्ष के लोग आधी आबादी को सिर्फ नारों तक ही सीमित रखना चाहते हैं। ये नहीं चाहते हैं कि आधी आबादी की महिला सशक्तिकरण राजनीतिक भागीदारी में बदले, यह नहीं चाहते कि महिला आगे बढ़े।

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क्रेडिट लेने का विषय नहीं

श्रेयसी सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि यह क्रेडिट लेने का विषय नहीं है। यह लोकतंत्र है। केवल बीजेपी या एनडीए की महिला ही चुनाव नहीं लड़ेगी बल्कि देश की सभी महिलाओं के लिए समान रूप से आरक्षण का लाभ मिलेगा। विपक्ष के लोग कुतर्क देकर इन लोगों ने वोटिंग से इनकार कर दिया। सिर्फ एक बिल नहीं गिरा बल्कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन के जितने भी नेता थे भारत की महिलाओं की नजरों में गिर गए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछली बार जब जनगणना हुआ था तब 55 करोड़ की आबादी थी आज वह 140 करोड़ के आसपास है। आज एक सांसद को 26 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करना पड़ रहा है। तो क्या आज परिसीमन की जरूरत नहीं है ? आज अगर विधेयक लागू होता तो महिलाओं का प्रतिनिधित्व निश्चित रूप से बढ़ता। विपक्ष के कुतर्क में कहीं कोई दम नहीं है। 2029 में यह विधेयक लागू नहीं हो इसका उन्होंने पूरा प्रयास किया।

झारखंड में जुमलेबाजी वाली मईया योजना

बिहार की पूर्व मंत्री ने कहा कि झारखंड में जुमलेबाजी वाली मईया योजना चलाई जा रही है, आप घर बैठकर महिलाओं को पैसा देते हैं लेकिन जब प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ती हुई दिखती है तो झामुमो , कांग्रेस , राजद सहित विपक्ष के लोगों को यह हजम नहीं होता है। महिला अच्छी नेता बने, उनको प्रतिनिधित्व मिले, यह विपक्ष को गवारा नहीं है। इनका दोहरा चरित्र उजागर हो चुका है।

उन्होंने कहा कि झूठी नीतियों और नारेबाजी में विपक्ष के लोग आगे खड़े मिलते हैं लेकिन जब संवैधानिक रूप से अधिकार देने की बात आती है तो महिलाओं के खिलाफ वोटिंग करते हैं, ताली बजाते हैं, मुस्कुराते हैं। ऐसा लगता है कोई उत्साह और कोई त्यौहार मना रहे हैं। निश्चित रूप से उनके व्यवहार से देश की सारी महिलाएं आहत हुई है, इसका इन्हें खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा।

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