रांची: हजारीबाग के पूर्व डीसी और चर्चित आईएएस (IAS) अधिकारी विनय चौबे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सेवायत भूमि घोटाले के गंभीर आरोपों में जेल में बंद विनय चौबे की जमानत याचिका पर अब देश की सर्वोच्च अदालत की नजर है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने विनय चौबे की याचिका पर सुनवाई की।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला हजारीबाग जिले में डीसी के पद पर रहते हुए सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के मुताबिक अगस्त 2025 में एसीबी ने कांड संख्या 9/2025 के तहत मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसी विनय चौबे के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) भी जमा कर चुकी है। वहीं इससे पहले 6 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बेल देने से साफ इनकार कर दिया था और उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। शीर्ष अदालत ने फिलहाल कोई भी राहत देने के बजाय राज्य सरकार से इस पूरे प्रकरण पर स्पष्टीकरण मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 23 मार्च को तय की गई है, जिस पर पूरे प्रशासनिक महकमे की निगाहें टिकी हैं।


