चाईबासा: झारखंड पुलिस को संगठित अपराध के खिलाफ एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सादर थाना क्षेत्र स्थित मंडल चाईबासा कारा (चाईबासा जेल) के मुख्य द्वार पर हुई फायरिंग की घटना के करीब डेढ़ साल बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी को दबोच लिया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पलामू जिले के तरहसी थाना क्षेत्र के महुडंडवा गांव निवासी समीर अंसारी उर्फ नसरू के रूप में हुई है। वह कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा के गिरोह का गुर्गा बताया जा रहा है।
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पलामू से हुई गिरफ्तारी
चाईबासा पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पलामू जिले के तरहसी थाना अंतर्गत महुडंडवा गांव में छापेमारी की। पुलिस टीम ने वहां छिपे समीर अंसारी को धर दबोचा। डीएसपी तरुण कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपी समीर का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह इस वारदात का अहम हिस्सा था।
क्या है पूरा मामला?
जिले के डीएसपी तरुण कुमार ने बताया कि 6 अक्टूबर 2024 को अज्ञात अपराधियों ने चाईबासा जेल के मेन गेट के पास फायरिंग की थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सदर थाना में कांड संख्या 79/2024 दर्ज किया था। 16 अक्टूबर 2024 को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य और मानवीय अनुसंधान के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए समीर अंसारी उर्फ नसरू को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने घटना में शामिल अन्य साथियों के नाम भी बताए हैं। पुलिस के अनुसार इस वारदात में शामिल सभी आरोपी सुजीत सिन्हा गिरोह से जुड़े हुए हैं।
आरोपी की निशानदेही पर बाइक बरामद
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने समीर की निशानदेही पर वह काले रंग की पल्सर मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली है, जिसका इस्तेमाल फायरिंग की वारदात को अंजाम देने के लिए किया गया था। पुलिस अब उस बाइक के असली मालिक और गिरोह के अन्य नेटवर्क की तलाश में जुटी है।
पहले से दर्ज हैं आपराधिक मामले
डीएसपी के अनुसार समीर अंसारी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ डाल्टनगंज के शहर थाना में भी आर्म्स एक्ट के तहत कांड संख्या 33/2025 दर्ज है।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इस कार्रवाई में सदर थाना प्रभारी सह डीएसपी तरुण कुमार के साथ एसआई उपेंद्र नारायण सिंह, श्रीकांत कुमार और सदर थाना के अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।


