Tuesday, June 30, 2026

हूल दिवस के दिन सिदो-कान्हू के वंशजों सहित 53 लोगों को SDM कोर्ट का नोटिस, पूर्व CM चंपाई बोले- ‘यह वीर भूमि का अपमान’

साहेबगंज/रांची: अमर शहीद सिदो-कान्हू मुर्मू के 171वें हूल दिवस समारोह के मौके पर साहेबगंज के भोगनाडीह में प्रशासनिक कार्रवाई ने एक बड़ा सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। साहेबगंज के अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) अमर जॉन आईन्द की अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ( BNSS ) की धारा 126/135 के तहत सिदो-कान्हू के वंशजों समेत 53 लोगों को नोटिस जारी किया है।

इस नोटिस के जरिए सभी को कोर्ट में हाजिर होने और 10 हजार रुपये का शांति बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया है। नोटिस पाने वालों में भोगनाडीह के ग्राम प्रधान बबलू हांसदा सहित कई ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और तलबड़िया, पहाड़पुर, बरहेट, बोरियो व तालझारी क्षेत्र के निवासी शामिल हैं। प्रशासन का तर्क है कि हूल दिवस पर कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर यह एहतियाती कदम उठाया गया है।

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क्यों जारी हुआ नोटिस? जानिए क्या है पूरा मामला

प्रशासन का तर्क है कि हूल दिवस के पावन अवसर पर कानून व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए यह एहतियातन कदम उठाया गया है। बरहेट थाना प्रभारी कुमार गौरव ने 25 जून 2026 को एक नॉन-एफआईआ रिपोर्ट एसडीएम कोर्ट को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में अंदेशा जताया गया था कि 30 जून को आयोजित होने वाले समारोह के दौरान कुछ लोगों की गतिविधियों से कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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नोटिस के साथ सिदो-कान्हू के वंसज

इसी रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने एक्शन लिया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी अपराध की सजा नहीं है, बल्कि एक निवारक कदम है ताकि ऐतिहासिक हूल दिवस समारोह पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

“क्या शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी बॉन्ड भरना होगा?” – चंपाई सोरेन

इस प्रशासनिक कार्रवाई के सामने आते ही झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने मोर्चा खोल दिया है और वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला है। चंपाई सोरेन ने इसे आदिवासी समाज और हूल आंदोलन की महान विरासत का सीधा अपमान बताया है।

सरकार को घेरते हुए चंपाई सोरेन ने कहा: “सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को भूल चुकी है। हूल दिवस के दिन वीर भूमि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल और 58 मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि जब सन 1855 में वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हूल ( विद्रोह ) का शंखनाद किया था, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि आजादी के इतने दशकों बाद उनके अपने ही वंशजों और ग्रामीणों को अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने पड़ेंगे और बॉन्ड भरना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि वीर शहीदों की विरासत को कमजोर करने वालों को राज्य की जनता कभी माफ नहीं करेगी।

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क्या है BNSS की धारा 126?

नए कानूनी प्रावधानों के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को दंडित करना नहीं होता है। यदि कार्यकारी मजिस्ट्रेट को पुलिस रिपोर्ट या किसी माध्यम से यह अंदेशा होता है कि किसी व्यक्ति की वजह से समाज में शांति भंग हो सकती है या कानून व्यवस्था के समक्ष संकट खड़ा हो सकता है, तो वह संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है। इसके तहत व्यक्ति को एक निश्चित अवधि के लिए शांति बनाए रखने का निजी मुचलका और जमानती पेश करने का आदेश दिया जाता है।

फिलहाल भोगनाडीह में हुई इस कार्रवाई के बाद अब स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासियों में रोष है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह घेरने की रणनीति बना रहा है।

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