Thursday, July 23, 2026

17 साल बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की वापसी

बांग्लादेश : बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान लंबे समय बाद ढाका लौट आए हैं। 2008 में देश छोड़कर लंदन गए तारिक रहमान की वापसी को बांग्लादेश की सियासत में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। आज ढाका में उनके समर्थकों के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है। तारिक रहमान के ढाका पहुंचते ही राजधानी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। BNP समर्थकों और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। सड़कों, सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में तारिक रहमान का नाम छाया हुआ है। कई लोग इसे BNP के लिए नई शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं।

BNP सरकार और तारिक का दबदबा

बांग्लादेश में 2001 से 2006 तक BNP की सरकार रही और उस समय खालिदा जिया देश की प्रधानमंत्री थीं। हालांकि उस दौर में यह आम धारणा थी कि सरकार की असली कमान उनके बेटे तारिक रहमान के हाथ में है। सत्ता और संगठन दोनों में उनका प्रभाव काफी मजबूत माना जाता था।

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2004 का ढाका ग्रेनेड हमला

BNP शासनकाल के दौरान 2004 में ढाका में एक बड़ा राजनीतिक हमला हुआ। यह ग्रेनेड अटैक उस समय विपक्ष की नेता शेख हसीना की एक रैली में हुआ था। इस हमले में कई वीवीआईपी और कार्यकर्ताओं की जान गई थी। इस घटना ने बांग्लादेश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी काफी चर्चा हुई।

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राजनीतिक संकट और आपातकाल

2006 में खालिदा जिया सरकार का कार्यकाल खत्म होने के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई। चुनाव को लेकर विवाद हुआ और जनवरी 2007 में आपातकाल घोषित कर दिया गया। इसके बाद फखरुद्दीन अहमद के नेतृत्व में सेना समर्थित अंतरिम सरकार बनी। इस सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा अभियान चलाया।

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माइनस टू फॉर्मूला और गिरफ्तारी

इस दौर को माइनस टू फॉर्मूला के नाम से जाना गया। इसका मकसद था शेख हसीना और खालिदा जिया दोनों के राजनीतिक प्रभाव को कम करना। इसी दौरान खालिदा जिया को गिरफ्तार कर लिया गया। BNP के लिए यह समय बेहद मुश्किल था। पार्टी नेतृत्व कमजोर पड़ गया और संगठन बिखरने लगा।

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तारिक रहमान पर गंभीर आरोप

इस समय तारिक रहमान पर हावा भवन करप्शन मामले में करीब 20 मिलियन डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा। वहीं खालिदा जिया पर जिया चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े मामले में 2.1 करोड़ टका के दुरुपयोग का केस चला। इन मामलों ने BNP की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया।

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शपथ पत्र और लंदन प्रस्थान

2008 में खालिदा जिया को रिहा कर दिया गया, लेकिन तारिक रहमान को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने इलाज के लिए लंदन जाने की अनुमति मांगी। सरकार ने इजाजत तो दी, लेकिन शर्त रखी गई कि उन्हें लिखित शपथ पत्र देना होगा कि वे बांग्लादेश की राजनीति में वापस नहीं लौटेंगे। इसके बाद तारिक रहमान लंदन चले गए और वर्षों तक वहीं रहे।

2024 के बाद बदले हालात

समय के साथ बांग्लादेश की राजनीति ने एक बार फिर करवट ली। 2024 में शेख हसीना की सरकार के अपदस्थ होने के बाद तारिक रहमान पर लगे सभी आरोप हटा लिए गए। उन्हें कानूनी रूप से बरी कर दिया गया। वहीं खालिदा जिया की सेहत लगातार खराब होती गई, जिससे पार्टी में नेतृत्व को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गईं।

तारिक रहमान की ढाका वापसी को BNP के पुनरुत्थान के तौर पर देखा जा रहा है। यह साफ है कि 2008 में दिया गया शपथ पत्र अब इतिहास बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि तारिक रहमान बांग्लादेश की राजनीति में किस तरह की भूमिका निभाते हैं और क्या वे अपनी मां की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा पाते हैं या नहीं।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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