Saturday, June 13, 2026

राज्यसभा चुनाव : निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी की राह मुश्किल, नामांकन में त्रुटि से फंसा पेंच

रांची : झारखंड में राज्यसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछते ही नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) के दौरान एक दिलचस्प मोड़ सामने आया है. जहां एक ओर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के प्रत्याशियों ने तकनीकी परीक्षा आसानी से पास कर ली है, वहीं निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी का नामांकन नाम-विवाद के कारण अधर में लटक गया है. नाथवानी के दस्तावेजों में नाम के हेर-फेर को लेकर दर्ज कराई गई आपत्ति के बाद चुनाव अधिकारी ने उनके नामांकन को होल्ड पर रख दिया है, जिस पर अब बुधवार सुबह फैसला होना है.

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नाम के फेर में फंसे नाथवाणी

दस्तावेजों की जांच के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के कागजातों में एक तकनीकी त्रुटि सामने आई. शिकायत के मुताबिक, कुछ दस्तावेजों में उनका नाम परिमल नाथवानी दर्ज है, तो कुछ जगहों पर इसे नाथवानी परिमल लिखा गया है. इस भाषाई और तकनीकी उलटफेर को आधार बनाकर उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई गई. मामला गरमाते ही रिटर्निंग ऑफिसर ने फिलहाल नामांकन को होल्ड पर डाल दिया है.

विधानसभा पहुंचे नाथवाणी

विवाद की भनक लगते ही परिमल नाथवानी तुरंत विधानसभा सचिवालय पहुंचे. उन्होंने विधानसभा के प्रभारी सचिव सह रिटर्निंग ऑफिसर रंजीत कुमार के समक्ष उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट की. इस दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में कानूनी पहलुओं को लेकर लंबी मैराथन बैठक और विचार-विमर्श का दौर चला. दिलचस्प बात यह रही कि निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी इस दौरान सचिवालय पहुंचे और पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर बनाए रखी, जिससे इस चुनाव के सियासी समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं.

बैजनाथ राम और प्रणव झा की राह आसान

• जेएमएम उम्मीदवार: बैजनाथ राम के नामांकन पत्रों की जांच पूरी हो चुकी है और उसे वैध पाया गया है.
• कांग्रेस उम्मीदवार: प्रणव झा का पर्चा भी पूरी तरह सही मिला, जिससे उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी मिल गई है.

बुधवार सुबह 11 बजे सुनवाई 

रिटर्निंग ऑफिसर ने निर्देश दिया है कि दर्ज आपत्ति पर अंतिम सुनवाई बुधवार सुबह 11 बजे होगी. इस दौरान परिमल नाथवानी या उनके अधिकृत एजेंट को खुद उपस्थित रहना होगा. अब सबकी नजरें कल की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या चुनाव आयोग इस नाम-विवाद को महज एक लिपिकीय (तार्किक) भूल मानकर नाथवानी का नामांकन वैध करता है, या फिर यह तकनीकी पेंच उनकी उम्मीदवारी के लिए कोई बड़ा रोड़ा बनेगा.

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