नई दिल्ली: पेपर लीक और परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने को लेकर लोकसभा में आज सोमवार को केंद्र सरकार के ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश करने के ठीक पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों को लेकर नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई पावर्ड टास्क फ़ोर्स बनाने का ऐलान किया.
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प्रधानमंत्री का ऐलान

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर बताया है कि उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही परीक्षाओं की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे. पीएम मोदी ने कहा है, “जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है वे जेलों में सड़ रहे हैं. हम फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं. हम कल भी पार्लियामेंट में कठोर कानूनी प्रावधानों के साथ नया क़ानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.”
“लेकिन हमें भविष्य के लिए सोचना है. हमारी परीक्षा पद्धति भरोसेमंद हो, पारदर्शी हो, हमारी परीक्षा पद्धति में सबसे ज़्यादा तकनीक का इस्तेमाल हो, इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए विश्व प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी जी के नेतृत्व में एक हाई पावर्ड टास्क फ़ोर्स बनाने का फ़ैसला किया गया है.” उन्होंने कहा, “यह परीक्षा सुधार की तरफ़ फ़ोकस करेगा और जल्द से जल्द आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने का काम, इसकी रिपोर्ट के आधार पर कर दिया जाएगा.”
हाई पावर्ड टास्क फ़ोर्स

समाचार एजेंसी एएनआई और आईएएनएस के मुताबिक़, “हाई पावर्ड टास्क फोर्स तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी, इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, आईबी के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं.”
नंदन नीलेकणी आईटी कंपनी ‘इन्फ़ोसिस’ के सह-संस्थापक हैं. नंदन नीलेकणी ने ही मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में ‘आधार कार्ड’ की योजना शुरू की थी. हाल के दिनों में तकनीकी क्षेत्र के साथ ही पर्यावरण और बायो डायवर्सिटी के मुद्दे पर नंदन नीलेकणी काफ़ी सक्रिय रहे हैं.
पीएम की घोषणा पर कांग्रेस ने कहा
पीएम मोदी की घोषणा पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “दोस्तों, जून 2024 में नीट-यूजी समेत कई परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद, मोदी सरकार ने परीक्षाओं के ‘पारदर्शी, सुचारु और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने’ के लिए डॉक्टर के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था. जुलाई 2026 में नीट-यूजी और अन्य परीक्षाओं में एक बार फिर गड़बड़ी के बाद, मोदी सरकार ने परीक्षा सुधार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक ‘हाई पावर्ड टास्क फोर्स’ का गठन किया है.”
101 सिफारिशें लागू नहीं
जयराम रमेश ने आगे लिखा, “मोदी सरकार अब तक के. राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों को पूरी तरह लागू नहीं कर पाई है. वास्तव में, 2024 और 2026 के पेपर लीक के बीच लगभग दो वर्षों में, उसने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के लिए एक पूर्णकालिक महानिदेशक तक नियुक्त नहीं किया.” उन्होंने आरोप लगाया, “आखिरकार, यह प्रधानमंत्री की अपूरणीय रूप से प्रभावित छवि को सुधारने का केवल एक हाई-पावर्ड प्रयास है.”


