इंफाल: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लगभग एक साल बाद राष्ट्रपति शासन खत्म हो गया। मंगलवार को बीजेपी विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले गृह मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से राज्य से राष्ट्रपति शासन खत्म करने की अधिसूचना जारी की, जिसके बाद युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर राज्य में नई सरकार बनाने का दावा पेश किया था।
बुधवार को वाई खेमचंद सिंह ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके साथ नेमचा किपगेन और एल. दीखो ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह इंफाल स्थित लोक भवन में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने सभी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. बीजेपी मणिपुर ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट कर इस संबंध में लिखा कि वाई. खेमचंद सिंह के अनुभव और दूरदर्शी नेतृत्व में मणिपुर शांति, विकास और सुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ेगा और राज्य में स्थिरता व प्रगति का नया दौर शुरू होगा.
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान गोविंदास कोंथौजम ने गृह मंत्री पद की शपथ ली, जबकि खुराइज़म लोकेन ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. एनपीएफ विधायक एल. दीखो ने डिप्टी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, वहीं कुकी समुदाय से आने वाली बीजेपी विधायक नेमचा किपगेन ने वर्चुअली उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 62 वर्षीय वाई. खेमचंद सिंह को मंगलवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में पहले बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया था, जिसके बाद उन्हें एनडीए विधायक दल का नेता घोषित किया गया.
गौरतलब है कि मणिपुर में फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू था. तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मई 2023 में शुरू हुई मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा को संभालने में नाकामी के आरोपों के बीच फरवरी 2025 में अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था. वहीं मणिपुर में जारी हिंसा में कई जिलों में बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान हुआ और हजारों लोग विस्थापित हुए.


