Thursday, November 5, 2026

पीएम मोदी ने देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का किया उद्घाटन, कहा – ‘संकट के समय भारत ने लिए सही फैसले’

जोधपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के पहले ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। यह देश के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में एक बड़ी उपलब्धि है। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए। संकट का समय रहते सटीक आंकलन किया। प्रभावी रणनीति बनाई। भारत के संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया। भारत की डिप्लोमेटिक पावर का सकारात्मक इस्तेमाल किया और तब जाकर भारत सकंट से उबर पाया है।”

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पूरी दुनिया में हाहाकार मचा

राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में निर्मित इस ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के उदघाटन के मौके पर पीएम मोदी ने कहा, “आज राजस्थान की इस धरती से मैं देश के एक और सामर्थ्य की चर्चा करूंगा। आप भी देख रहे हैं कि पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है, हर देश त्रस्त है। इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया। बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं लेकिन 21वीं सदी के इस सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े हैं।”

अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त

उन्होंने आगे कहा, “जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी, तब किस स्केल पर दिनरात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था। वो मेहनत, वो प्रयास, वो धैर्य, नीतिगत और कूटनीतिक स्तर पर उठाया गया एक-एक संवेदनशील कदम कभी न कभी इतिहास लिखेगा। ये सब अभूतपूर्व है।”

उन्होंने आगे कहा, “जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी, तब किस स्केल पर दिनरात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था। वो मेहनत, वो प्रयास, वो धैर्य, नीतिगत और कूटनीतिक स्तर पर उठाया गया एक-एक संवेदनशील कदम कभी न कभी इतिहास लिखेगा। ये सब अभूतपूर्व है।”

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “बहुत अफवाएं फैलाई गई, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वो सफल नहीं हो पाए। दूर-सुदूर इलाकों में भी छोटी मोटी अड़चनों के अलावा ईंधन सप्लाई में कोई बड़ी चुनौती नहीं आई।”

75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा

उन्होंने बताया, “अप्रैल से जून के बीच ही अकेले डीजल-पेट्रोल में 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा कंपनियों को सहना पड़ा और इस घाटे को पूरा करने की जिम्मेदारी सरकारी खजाने से उठाई गई। हमने प्रति लीटर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी भी कम की और बहुत ज्यादा बोझ जनता पर नहीं पड़ने दिया।”

एयर नाऊ स्पेशल

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