Thursday, July 23, 2026

सांसद राघव चड्ढा बने डिलीवरी बॉय, गिग वर्कर्स की समस्याएं जानने पहुंचे घर-घर

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की जमीनी हकीकत समझने के लिए एक अनोखा कदम उठाया है। वह खुद डिलीवरी बॉय की वर्दी पहनकर लोगों के घरों तक सामान पहुंचाते नजर आए। इसका एक वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया है, जो अब चर्चा में है।

डिलीवरी बॉय बनकर जमीनी अनुभव

राघव चड्ढा ने करीब 40 सेकेंड का वीडियो शेयर किया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह डिलीवरी बॉय की ड्रेस पहनकर घर से निकलते हैं। बाहर एक डिलीवरी राइडर स्कूटर के साथ खड़ा होता है। राघव चड्ढा उससे बैग लेते हैं, हेलमेट पहनते हैं और स्कूटर पर बैठकर ऑर्डर पिकअप करते हैं। इसके बाद वह ऑर्डर को तय पते तक पहुंचाने निकल पड़ते हैं। वीडियो के अंत में लिखा है Stay Tuned। इस वीडियो के साथ राघव चड्ढा ने लिखा, “बोर्डरूम से दूर, जमीनी स्तर पर। मैंने उनका दिन जिया। जुड़े रहिए।”

पहले भी संसद में उठा चुके हैं मुद्दा

यह पहला मौका नहीं है जब राघव चड्ढा ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की बात उठाई हो। इससे पहले संसद के शीतकालीन सत्र में उन्होंने कहा था कि डिलीवरी बॉय, राइडर, ड्राइवर और टेक्नीशियन की हालत आज दिहाड़ी मजदूरों से भी खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा था कि ये वर्कर्स सम्मान, सुरक्षा और उचित कमाई के हकदार हैं। साथ ही उन्होंने 10 मिनट डिलीवरी के कल्चर पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस दबाव में वर्कर्स अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

क्विक कॉमर्स पर भी जताई चिंता

राघव चड्ढा ने संसद में कहा था कि क्विक और इंस्टेंट कॉमर्स ने भले ही लोगों की जिंदगी आसान बना दी हो, लेकिन इसके पीछे एक ऐसी साइलेंट वर्कफोर्स है, जो हर मौसम और हर हाल में काम करती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां अरबों डॉलर की वैल्यूएशन हासिल कर चुकी हैं, लेकिन जिन वर्कर्स की मेहनत से यह मुमकिन हुआ, वे आज भी असुरक्षित हालात में काम कर रहे हैं।

सरकार ने जारी किए ड्राफ्ट सोशल सिक्योरिटी रूल्स

गिग वर्कर्स के मुद्दे पर बहस के बाद 4 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार ने ड्राफ्ट सोशल सिक्योरिटी रूल्स जारी किए थे। एक पोस्ट के जरिए सरकार ने इसे गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की पहचान, सुरक्षा और सम्मान की दिशा में पहला कदम बताया था। डिलीवरी बॉय बनकर राघव चड्ढा का यह कदम गिग वर्कर्स की रोजमर्रा की चुनौतियों को सामने लाने की कोशिश माना जा रहा है। वीडियो और उनके बयानों से साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीति और नीति-निर्माण में और अहम हो सकता है।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर