न्यूज़ डेस्क : बिहार के भोजपुर में कथित फर्जी एनकाउंटर के बाद बढ़ते दबाव के कारण पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस केस में पुलिस ने मारे गए सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी के घरवालों की शिकायत के आधार पर SDPO राजेश शर्मा और थानेदार राजेश मालाकार समेत बाकी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। वहीं परिवार के खिलाफ दर्ज FIR को पुलिस ने वापस ले लिया है।
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श्रद्धांजलि सभा सह महापंचायत
वहीं दूसरी तरफ भरत तिवारी के एनकाउंटर के खिलाफ बिलौटी गांव स्थित बाबा कुंडेश्वर नाथ महादेव मंदिर के प्रांगण में विशाल श्रद्धांजलि सभा सह महापंचायत का आयोजन किया गया है। इसमें काफी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश हरियाणा से यहां महापंचायत में लोगों की पहुंचने की संभावना है। वहीं भरत तिवारी को न्याय दिलाने की मांग अब धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है। लगातार लोग उसको न्याय दिलाने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं।
सरेंडर करो, कुछ नहीं होगा
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अभियान का नेतृत्व करने वाले एसडीपीओ राजेश शर्मा को लाइन हाजिर कर पुलिस मुख्यालय में योगदान देने का आदेश दिया गया है। उनके खिलाफ हत्या की प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। इससे पहले ग्रामीणों का दावा था कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन बाद में मौके पर मौजूद पुलिस वालों ने उसका कथित एनकाउंटर कर जान ले ली.
ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस और भरत तिवारी के बीच काफी देर तक बातचीत चली थी। बताया जा रहा है कि एसडीपीओ राजेश शर्मा ने उसे भरोसा दिलाया कि आत्मसमर्पण करने पर उसकी जान को कोई खतरा नहीं होगा। इसी भरोसे पर भरत ने अपना हथियार फेंक दिया और पुलिस के साथ चलने को तैयार हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आत्मसमर्पण के बाद एसडीपीओ उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे लेकर आगे बढ़ रहे थे। तभी अचानक कई पुलिसकर्मियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। देखते ही देखते गोलियां चलने लगीं और कुछ ही क्षणों में भरत तिवारी खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भरत तिवारी को कुल तीन गोलियां मारी गईं।
अब इस बहुचर्चित मुठभेड़ की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। भरत तिवारी मुठभेड़ अब भोजपुर की सीमा से निकलकर पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन चुकी है। माना जा रहा है कि एसडीपीओ की भूमिका, घटनास्थल की परिस्थितियों और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई जानकारी की गहन पड़ताल की जाएगी। जांच के निष्कर्ष तय करेंगे कि यह पुलिस की वैध कार्रवाई थी या फिर आत्मसमर्पण के बाद हुई कथित हत्या।




