मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने बाघों की मौत से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले ढाई महीनों (21 नवंबर से 2 फरवरी) के भीतर कुल आठ बाघों की मृत्यु हुई है। इनमें से चार मौतें टाइगर रिजर्व के अंदर प्राकृतिक कारणों से हुईं, जबकि शेष चार बाघों की जान रिजर्व के बाहर सामान्य वन क्षेत्रों में करंट की चपेट में आने से गई। अधिकारियों ने अदालत को आश्वस्त किया कि सभी मृत बाघों के अवशेष सुरक्षित पाए गए हैं, जो अवैध शिकार की संभावना को नकारते हैं।
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बढ़ते आंकड़े और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर इस जनहित याचिका में राज्य में बाघों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। आंकड़ों के अनुसार, ‘टाइगर स्टेट’ होने के बावजूद मध्य प्रदेश में बाघों की मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है; जहाँ 2022 में 43 मौतें हुई थीं, वहीं 2025 में अब तक रिकॉर्ड 54 बाघों की जान जा चुकी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वन विभाग का निगरानी और खुफिया तंत्र (Surveillance & Intelligence) विफल साबित हो रहा है, जिसके कारण बिजली के तारों से शिकार की घटनाएं बढ़ रही हैं।
अदालत की कार्रवाई और भविष्य की रणनीति
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि संवेदनशील इलाकों में बिजली की लाइनों को सुरक्षित और सुदृढ़ करने के लिए विद्युत विभाग को निर्देश भेजे गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि विभाग अक्सर मौतों को आपसी संघर्ष बताकर पल्ला झाड़ लेता है, जबकि बड़ी संख्या में तेंदुए भी इन खतरों का शिकार हो रहे हैं। हाई कोर्ट ने अब याचिकाकर्ताओं को इस स्टेटस रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च के लिए निर्धारित की है।


