Thursday, July 23, 2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, जाने क्या था पूरा मामला…

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनके इस्तीफे के पीछे लंबे समय से चल रहा कैश कांड और उससे जुड़ा विवाद प्रमुख कारण माना जा रहा है। 14 मार्च 2025 को दिल्ली स्थित उनके आवास में आग लगने की घटना सामने आई थी, जिसमें 500-500 रुपए के नोटों के बंडल जलने की बात सामने आई है। इस घटना के बाद मामला काफी चर्चा में आ गया और जांच शुरू की गई।

दिल्ली से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर

विवाद के बाद जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया। उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ ली थी। लेकिन उन्हें कोई न्यायिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। उनके खिलाफ चल रही जांच को देखने हुए उन्हें न्यायिक कार्यों से दूर रखा था। जांच पूरी होने तक उन्हें किसी भी केस की सुनवाई का दायित्व नहीं दिया गया।

महाभियोग प्रस्ताव को दी चुनौती

कैश कांड के बाद जस्टिस वर्मा ने अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि राज्यसभा में प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ, इसके बावजूद लोकसभा द्वारा जांच समिति बनाना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि जांच समिति के गठन में कुछ खामियां नजर आती हैं, लेकिन यह देखना होगा कि क्या ये खामियां पूरी प्रक्रिया को रद्द करने के लिए पर्याप्त हैं।

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समिति गठन पर कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत लोकसभा स्पीकर के पास यह अधिकार है कि वे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित कर सकते हैं, भले ही राज्यसभा में ऐसा प्रस्ताव पारित न हुआ हो। कोर्ट ने 8 जनवरी को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। साथ ही जस्टिस वर्मा को संसदीय समिति के सामने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने से भी इनकार कर दिया गया था। लगातार विवाद और कानूनी प्रक्रिया के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। अब आगे इस मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया का रुख क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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