राँची: झारखंड के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। मंगलवार को रांची स्थित पीएमएलए (प्रीवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट – PMLA) की विशेष अदालत में हुई सुनवाई के दौरान एक ऐसी गवाही हुई, जिसने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके करीबियों की दिककतें बढ़ा दी है। मामले के मुख्य गवाहों में से एक संतोष कुमार ने अदालत के सामने न केवल अपना जुर्म कबूला, बल्कि पैसों के लेन-देन के पूरे नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया।
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फोटो देखते ही कबूला सच
सुनवाई के दौरान जब ईडी के विशेष लोक अभियोजक ने संतोष कुमार को एक संदिग्ध व्यक्ति की तस्वीर दिखाई। अभियोजक ने पूछा— क्या आपने इस व्यक्ति से कभी पैसा लिया है? तस्वीर देखते ही संतोष कुमार ने बिना झिझक स्वीकार किया कि उसने न केवल उस व्यक्ति से मोटी रकम वसूली थी, बल्कि पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके ओएसडी संजीव लाल के निर्देशों पर उस पैसे को ठिकाने भी लगाया था।
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर के बदले कमीशनखोरी और मनी लाउंड्रिंग से जुड़ा है। ईडी ने इस मामले में संजीव लाल के घरेलू सहायक के घर से 32 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की थी, जिसके बाद आलमगीर आलम की गिरफ्तारी हुई थी।
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संतोष ने पैसों की लेनदेन का किया खुलासा
संतोष कुमार ने अपनी गवाही में इस घोटाले के मोडस ऑपेरंडी पर विस्तार से प्रकाश डाला। उसने बताया कि वो संजीव लाल (आलमगीर आलम के तत्कालीन ओएसडी) के निर्देश पर इंजीनियरों और ठेकेदारों से संपर्क करता था। टेंडर मैनेज करने के बदले ठेकेदारों से करोड़ों की नकदी वसूली जाती थी। वसूले गए पैसों को संजीव लाल और आलमगीर आलम के बताए हुए ठिकानों पर पहुंचाया जाता था।
“मैने संजीव लाल के कहने पर ठेकेदारों से पैसे लिए और अलग-अलग समय पर तयशुदा जगहों पर उनकी डिलीवरी की।” – संतोष कुमार (अदालत में दी गई गवाही)
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