Friday, July 24, 2026

बाबूलाल मरांडी की कारकेड में शामिल जिप्सी बीच रास्ते में फिर हुई खराब, एक घंटे खराब रही जिप्सी

रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की कारकेड में शामिल जिप्सी हजारीबाग के चौपारण से रांची लौटने के दौरान इटखोरी मोड पदमा के पास खराब हो गई। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद किसी प्रकार मरम्मत कर पुनः बाबूलाल मरांडी अपने गंतव्य के लिए रवाना हो पाए। भारी बारिश में घंटे भर इस प्रकार बीच सड़क पर नेता प्रतिपक्ष का खड़े रहना, कहीं ना कहीं उनकी सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

इसे भी पढ़ें : झारखंड टेंडर घोटाला: पीएमएलए कोर्ट में संतोष कुमार की गवाही ने बढ़ाई पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की मुश्किलें

सुरक्षा के साथ खिलवाड़ : भाजपा

यह पहली बार नहीं है जब बाबूलाल मरांडी की कारकेड की गाड़ी बीच रास्ते में इस प्रकार खराब हुई है। इसके पूर्व इसी साल जनवरी में भी तिलैया में उनके काफिले की गाड़ी खराब हो चुकी है। इसके पहले भी उनकी बुलेटप्रूफ गाड़ी भी कई जगह खराब होने की बात सामने आई है।दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की सरकारी बुलेटप्रूफ गाड़ी सहित उनके काफिले की सभी गाड़ियां जर्जरावस्था में है, कह सकते हैं कि कंडम हो चुकी है। गाड़ियां 10/12 साल पुरानी हो गई है। बाबूलाल मरांडी दिन या रात कभी भी पूरे राज्य का भ्रमण करते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा इस प्रकार की लापरवाही उनकी सुरक्षा को खतरे में डालने जैसा है।

बाबूलाल मरांडी ने सीएम को लिखा था पत्र

इस संबंध में बाबूलाल मरांडी खुद इस पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर वस्तु स्थिति से अवगत करा चुके हैं। उन्होंने पत्र के माध्यम से राज्य सरकार को कहा था कि सरकार द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से 17 बुलेटप्रूफ वाहन खरीदे गए हैं। इन 17 वाहनों में से 3-4 वाहन का ही उपयोग हो रहा है, जबकि बाकी वाहन वैसे ही बिना उपयोग के खड़े रहते हैं। वाहन उपयोग नहीं होने से ये गाड़ियां खड़ी खड़ी खराब होंगी। नहीं हो तो ये गाड़ियां वरीय अफसरों को ही आवागमन के लिए दे दिया जाए ताकि खराब नहीं हो।

मरांडी ने पत्र के माध्यम से यह भी कहा कि उन्हें और अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों को दिए गए बुलेट प्रूफ वाहन 10-12 वर्ष पुराने हैं और यह वाहन करीब 2 लाख किलोमीटर चल चुके हैं। बार-बार खराब होने के कारण प्रवास यात्रा के दौरान काफी दिक्कत होती है। परंतु राज्य सरकार मामले में बेपरवाह बनी हुई है। यह पूर्व मुख्यमंत्रियों की जान के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर