रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( SIR ) को लेकर निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ( CEO ) के. रवि कुमार ने शनिवार को निर्वाचन सदन में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों के साथ एक अहम बैठक की। उन्होंने बताया कि 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक इन्यूमरेशन फेज ( गणना चरण ) चलाया जाएगा। इस दौरान ब्लॉक लेवल ऑफिसर ( BLO ) घर-घर जाकर मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए फॉर्म बांटेंगे और उनकी नई रंगीन फोटो के साथ हस्ताक्षर युक्त फॉर्म वापस संकलित करेंगे।
Highlights:
ये भी पढ़ें: परिसीमन का विरोध राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित, जनता को भ्रमित करने का प्रयास : मृत्युंजय शर्मा
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने साफ चेतावनी दी है कि गलत जानकारी देकर घोषणा पत्र जमा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत एक दंडनीय अपराध है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल यदि कोई मतदाता यह जानते हुए भी कि उसका नाम पहले से ही किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है, एक से अधिक स्थानों पर अपना नाम जुड़वाता है और फॉर्म में गलत घोषणा करके इस बात को छुपाता है, तो वह इस धारा के तहत दोषी माना जाता है। इस अपराध के लिए एक साल तक का कारावास, आर्थिक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
नागरिकता निर्धारण के लिए 3 बड़ी समय-सीमाएं तय
के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने की यह प्रक्रिया केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए है। नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत जन्मतिथि के आधार पर तीन मुख्य नियम लागू होंगे:
1. बर्थ राइट रूल ( 26 जनवरी 1950 – 1 जुलाई 1987 ): इस अवधि के बीच भारत में जन्मा हर व्यक्ति स्वतः भारतीय नागरिक माना जाएगा।
2. वन पैरेंट रूल ( 1 जुलाई 1987 – 2 दिसंबर 2004 ): इस दौरान भारत में जन्म लेने वाले व्यक्ति के माता या पिता में से किसी एक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।
3. टू पैरेंट रूल ( 2 दिसंबर 2004 के बाद ): इसके बाद जन्मे बच्चों के माता-पिता दोनों का भारतीय होना जरूरी है। या फिर एक पैरेंट भारतीय हो और दूसरा अवैध अप्रवासी न होकर वैध पासपोर्ट-वीजा धारक हो।
गैर-भारतीयों के लिए निर्देश
चुनाव आयोग ने गैर-भारतीयों के लिए सख्त निर्देश कहा है कि जो लोग गैर-भारतीय नागरिक हैं या जिन्होंने भारतीय नागरिकता त्याग दी है, वे इन्यूमरेशन फॉर्म को बिना भरे या बिना हस्ताक्षर किए तुरंत बीएलओ को वापस लौटा दें।
ये भी पढ़ें: 27 साल बाद मिला न्याय: झारखंड हाई कोर्ट ने डायन-बिसाही हत्या मामले में आरोपी को उम्रकैद से किया बरी




