Friday, June 26, 2026

ऑक्सीटोसिन मामले पर केंद्र का बड़ा एक्शन: जैक्सन लेबोरेट्रीज के दो राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द

नई दिल्ली: राजस्थान के कोटा में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से हुई प्रसूता महिलाओं की मौत के बाद मचे देशव्यापी हड़कंप के बीच केंद्र सरकार ने बेहद कड़ा कदम उठाया है। विवादों के घेरे में आई दवा निर्माता कंपनी जैक्सन लेबोरेट्रीज के खिलाफ सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की सिफारिश पर पंजाब और हिमाचल प्रदेश में स्थित कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं।

GMP नियमों की उड़ी थीं धज्जियां

कोटा के अस्पताल में हुए दर्दनाक हादसे के बाद CDSCO और पंजाब व हिमाचल प्रदेश के राज्य औषधि नियंत्रकों की एक हाई-लेवल संयुक्त टीम ने जैक्सन लेबोरेट्रीज के प्लांटों का औचक निरीक्षण किया था।

इस रेड के दौरान पाया गया कि कंपनी दवाओं के निर्माण से जुड़े बुनियादी नियमों यानी गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) के मानकों का पालन नहीं कर रही थी। लैब और प्रोडक्शन यूनिट में कई गंभीर खामियां और कमियां पाई गईं, जिसके बाद दोनों राज्यों के लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने कंपनी को बैन करते हुए लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।

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क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल और राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय की सुपर स्पेशियलिटी इकाई से जुड़ा है। यहां 5 मई से 17 मई के बीच सीजेरियन डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स और जांच में यह बात सामने आई कि डिलीवरी के दौरान महिलाओं को दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन नकली या सब-स्टैंडर्ड (घटिया क्वालिटी) के थे, जिन्हें जैक्सन लेबोरेट्रीज ने ही तैयार किया था। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार से विस्तृत डेथ ऑडिट रिपोर्ट तलब की है।

WHO ने भी मांगी रिपोर्ट

इस मामले की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है। वैश्विक स्तर पर दवाओं की निगरानी करने वाली संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मीडिया रिपोर्ट्स का संज्ञान लेते हुए भारत सरकार से इस मामले में अतिरिक्त जानकारी मांगी है।
दरअसल यह डब्ल्यूएचओ की अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था (फार्माकोविजिलेंस) का एक सामान्य और रूटीन हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि इस खतरनाक दवा का असर सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित है या इसे अन्य देशों में भी एक्सपोर्ट किया गया है, जहां मरीजों को खतरा हो सकता है।

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डब्ल्यूएचओ की इस पूछताछ का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसने कंपनी को दोषी मान लिया है। फिलहाल भारतीय नियामक एजेंसियां और केंद्र सरकार राजस्थान की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं।

सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि दवाओं की गुणवत्ता और जीवन रक्षक इंजेक्शनों के मानकों में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की जांच पूरी होने के बाद कंपनी के प्रमोटर्स पर आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।

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