Sunday, September 13, 2026

मेदिनीनगर फोरलेन हादसों पर CM हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान: DC और परिवहन मंत्री से मांगी 7 दिनों में रिपोर्ट

पलामू / रांची: झारखंड के पलामू जिला अंतर्गत मेदिनीनगर में फोरलेन सड़क पर लगातार हो रहे जानलेवा हादसों ने अब राज्य सरकार को हिलाकर रख दिया है। पोखराहा और जोड़ के पास महज एक सप्ताह के भीतर सड़क दुर्घटनाओं में चार लोगों की दर्दनाक मौत के बाद फूटे जनआक्रोश को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बेहद गंभीरता से लिया है।

मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए पलामू के उपायुक्त शशि रंजन और राज्य के सड़क परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ को हाई-लेवल निर्देश जारी किए हैं। सीएम ने फोरलेन पर सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

4 मौतों के बाद भड़का था गुस्सा: पुलिस कैंप पर हुआ था पथराव

पिछले सात दिनों में बैक-टू-बैक हुए सड़क हादसों के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा था। आक्रोशित लोगों ने मेदिनीनगर फोरलेन को जाम कर जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और लापरवाही के आरोप लगाए।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी बेकाबू हो गई थी कि उग्र भीड़ ने वहां बने पुलिस कैंप को भी निशाना बनाया और नुकसान पहुंचाया। हालात को काबू में करने और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रशासन को मौके पर भारी मात्रा में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा था।

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ये हैं हादसे की बड़ी वजहें

स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मेदिनीनगर का यह फोरलेन स्ट्रेच अब एक खतरनाक ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) में तब्दील हो चुका है। इसके पीछे कई बुनियादी कमियां सामने आई हैं। रात के समय सड़क पर पर्याप्त लाइट या हाईमास्ट लाइट न होने की वजह से विजिबिलिटी बेहद कम हो जाती है।

तीखे मोड़ों या दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर किसी भी तरह के चेतावनी संकेतक नहीं लगाए गए हैं। फोरलेन होने के कारण वाहन बेहद तेज गति से गुजरते हैं और गति सीमा को नियंत्रित करने का कोई जरिया नहीं है।

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ग्रामीणों ने सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें

सड़क पर आगे किसी मासूम की जान न जाए, इसके लिए ग्रामीणों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने सरकार और पलामू प्रशासन के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं। तेज रफ्तार वाहनों पर ब्रेक लगाने के लिए तत्काल रंबल स्ट्रिप्स और स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं। रात के अंधेरे को दूर करने के लिए पूरे संवेदनशील पैच पर हाईमास्ट लाइटें लगाई जाएं।

इसके साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों से पहले बड़े और स्पष्ट रिफ्लेक्टिव संकेतक बोर्ड लगाए जाएं। ओवरस्पीडिंग करने वाले वाहनों का चालान काटने के लिए ऑटोमैटिक स्पीड कैमरे इंस्टॉल हों। साथ ही पीक आवर्स के दौरान हाईवे पुलिस की गश्त और बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि पलामू जिला प्रशासन और परिवहन विभाग मिलकर युद्धस्तर पर इस फोरलेन को सुरक्षित बनाने का काम शुरू करेंगे।

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