Thursday, July 23, 2026

नेशनल वर्ड पावर चैंपियनशिप 2025-26 में झारखंड ने राष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मुंबई में आयोजित नेशनल वर्ड पावर चैंपियनशिप 2025-26 में झारखण्ड के स्टूडेंट्स (कक्षा 2 से 5) के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा यह अत्यंत गर्व का विषय है कि झारखण्ड के नन्हें स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर राज्य को गौरवान्वित किया है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से निकलकर मुंबई में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना और वहां अपनी योग्यता साबित करना राज्य में शिक्षा की मजबूत नींव को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए सभी सफल छात्र-छात्राओं को अपनी शुभकामनाएं देते हुए उन शिक्षकों और अभिभावकों की भी सराहना की, जिनके मार्गदर्शन और सहयोग से यह सफलता संभव हुई है। उन्होंने कहा कि झारखण्ड सरकार बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने और हमारे बच्चों को वैश्विक स्तर के अवसर प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुझे विश्वास है कि ये बच्चे भविष्य में और भी ऊंचाइयों को छुएंगे और पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बनेंगे।

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बच्चों ने अंग्रेजी दक्षता का लोहा मनवाया

झारखण्ड के बच्चों ने राज्य स्तरीय फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) चैंपियनशिप जीतने के बाद 22 अप्रैल 2026 को मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और अपनी अंग्रेजी दक्षता का लोहा मनवाया।झारखण्ड शिक्षा परियोजना परिषद और राज्य के इंग्लिश लिटरेसी पार्टनर LeapForWord के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्राथमिक स्तर कक्षा 2 से 5 के बच्चों में बुनियादी शिक्षा को सुदृढ़ करना है।

सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर

राज्य के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय रैंकिंग हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें, तो वे किसी भी वैश्विक चुनौती का सामना कर सकते हैं। सरकार के निरंतर प्रयासों से राज्य के दूरस्थ जिलों के बच्चों को भी अब राष्ट्रीय स्तर का मंच मिल रहा है, जो उनके समग्र विकास और आत्मविश्वास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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