रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी के डोरंडा थाना क्षेत्र में हुए चर्चित कार-बाइक दुर्घटना मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। जस्टिस संजय द्विवेदी की पीठ ने हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज टंडन के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई और जांच पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। वहीं, कोर्ट ने इस मामले के दूसरे पक्ष, मोबाज खान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उसके प्रतिबंधित संगठन PFI से संबंधों की जांच का निर्देश दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
मंगलवार, 17 फरवरी को डोरंडा के राजेंद्र चौक के पास अधिवक्ता मनोज टंडन की कार और मोबाज खान की मोटरसाइकिल के बीच टक्कर हुई थी। घटना के बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें युवक कार के बोनट पर लटका नजर आ रहा था। अधिवक्ता का पक्ष था कि वे भीड़ के हमले से बचने के लिए वहां से निकल रहे थे, जबकि युवक ने इसे जानलेवा हमला बताया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने युवक मोबाज खान द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए उन्मादी पोस्ट को अत्यंत गंभीर माना। कोर्ट ने टिप्पणी की कि शांति भंग करने और समाज में विद्वेष फैलाने वाली ऐसी गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर न्यायालय ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार और CBI को नोटिस जारी किया है। CBI को निर्देश दिया गया है कि वह मोबाज खान के प्रतिबंधित संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के साथ संपर्कों और उसकी संदिग्ध गतिविधियों की गहराई से जांच करे। एजेंसियों को अगली सुनवाई तक शपथ पत्र के माध्यम से अदालत में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है।
दरअसल अधिवक्ता मनोज टंडन ने अपनी याचिका में मांग की थी कि उनके खिलाफ दर्ज FIR को निरस्त किया जाए और पुलिस द्वारा जब्त की गई उनकी गाड़ी छोड़ी जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि एक सुनियोजित भीड़ ने उन पर हमला करने की कोशिश की थी, जिसकी जांच होनी चाहिए। अदालत ने इस संवेदनशील मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 24 मार्च 2026 की तारीख निर्धारित की है। तब तक के लिए मनोज टंडन के विरुद्ध किसी भी जांच प्रक्रिया पर रोक प्रभावी रहेगी।


