रांची: झारखंड में पेंशन भुगतान में हो रही देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने आदेश का पालन नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए पथ निर्माण विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, मुख्य अभियंता मनोहर कुमार, अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार श्रीवास्तव और कार्यपालक अभियंता विनोद कच्छप को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश की अनदेखी गंभीर मामला है।
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अधिकारियों के वेतन पर रोक
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यपालक अभियंता के वेतन भुगतान पर अगले आदेश तक तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि अगली सुनवाई तक आदेश का पालन नहीं हुआ, तो प्रधान सचिव का वेतन भी रोक दिया जाएगा। अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को 12 जून को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इससे साफ है कि कोर्ट इस मामले को लेकर बेहद सख्त है और अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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पुराने आदेश का नहीं हुआ पालन
यह मामला रंजीत बिहारी प्रसाद द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। इससे पहले कोर्ट ने 15 जनवरी 2024 को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पेंशन और अन्य लाभ तय कर आठ सप्ताह के भीतर भुगतान किया जाए, लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी इसका पालन नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपील दायर करने की बात कही गई, लेकिन अदालत ने इसे तकनीकी बहाना मानते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन नहीं करना गंभीर लापरवाही है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से साफ संकेत मिल रहा है कि अब पेंशन जैसे संवेदनशील मामलों में देरी करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे प्रभावित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।


