Thursday, July 23, 2026

झारखंड : 1.58 लाख करोड़ के बजट में मातृ सम्मान से लेकर महिलाओं के स्वास्थ्य तक की चिंता

रांची : झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में साल 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश किया। इसका नाम अबुआ दिशोम बजट दिया गया है। इस बजट में युवा, महिला और किसानों पर फोकस किया गया है। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि झारखंड का विकास अकेले राज्य के बस की बात नहीं है। इसमें केंद्र का आर्थिक सहयोग जरूरी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि अभी तक केंद्रीय करों में पांच हजार करोड़ और अनुदान का 11 हजार करोड़ अभी तक नहीं मिला। दूसरी ओर, केंद्र सरकार की अविवेकपूर्ण निर्णयों के कारण झारखण्ड के ऊपर घोर आर्थिक बोझ पड़ रहा है अथवा पड़ने वाला है।

उन्होंने कहा कि माल एवं सेवा कर के कर दर युक्तिकरण से झारखण्ड राज्य को प्रतिवर्ष 4 हजार करोड़ रुपये की क्षति हो रही है। इसी तरह मनरेगा का परिवर्तित नाम VB-G RAM G योजना के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 राशि के बंटवारे से झारखण्ड को लगभग प्रतिवर्ष 5 हजार 640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने वाला है। इसी तरह अनेकों प्रयास करने के बाद भी केंद्र सरकार द्वारा कोल कंपनियों के पास बकाया राशि 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये झारखण्ड को उपलब्ध नहीं कराया गया है।

सरकारी स्कूलों का एलान 

सरकारी विद्यालयों के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण हेतु हेमन्त सरकार कृत संकल्पित है। इस सोच के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार ने धनबाद में 2 तथा पलामू, लातेहार एवं गढ़वा में 1-1 कुल 5 झारखण्ड बालिका आवासीय विद्यालय के निर्माण का निर्णय लिया है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 100 नये उत्कृष्ट विद्यालय (CM School of Excellence) के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार के विशेष पहल पर शहीद के आश्रितों के लिए एक आदर्श विद्यालय की स्थापना और संचालन की व्यवस्था की जाएगी।

  • 17 पोलिटेकनिक संस्थान जे प्रगति योजना के तहत आइआइटी और एनआइटी के तहत विकसित होगा
  • 750 अबुआ दवाखाना खुलेगी
  • लातेहार, साहेबगंज तथा सरायकेला सदर अस्पताल मेडिकल कॉलेज के रूप में होंगे विकसित

किसानों के लिए एलान 

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार की मुख्य प्राथमिकता किसानों को ऋण से मुक्त करना, कृषि में समग्र विकास को बढ़ावा देना और सबसे महत्वपूर्ण किसानों की आय में वृद्धि करना रही है।”

उन्होंने कहा कि इसका असर भी दिखने लगा है। अद्यतन आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (पी०एल०एफ०एस०) के अनुसार कृषि प्रक्षेत्र में रोजगार का प्रतिशत गत तिमाही में 44.3 प्रतिशत से बढ़कर 50.4 प्रतिशत हो गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में लागू बिरसा बीज उत्पादन, विनिमय वितरण एवं फसल विस्तार योजना में वित्तीय वर्ष के 95 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2026-27 में 145 करोड़ रुपये किए जाने का प्रस्ताव है।

बंजर भूमि राईस फैलो उपयोजना एवं जलनिधि उपयोजना अन्तर्गत सरकारी/निजी तालाबों का गहरीकरण/जीर्णोद्धार कराया जा रहा है, जिसके माध्यम से कृषि कार्य हेतु अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसके लिए इस बार कुल 475 करोड 50 लाख रुपये का बजट प्रस्ताव है। कृषि समृद्धि योजना के तहत सौर ऊर्जा चालित सिंचाई इकाईयों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई। आगामी वित्तीय वर्ष में इस हेतु 75 करोड़ रुपये का बजटीय उपबंध किया गया है।

महिला किसान खुशहाली योजना

महिला किसान खुशहाली योजना के अंतर्गत महिला किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग से जोड़कर अद्यतन तकनीक की मदद दी जाएगी और ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इस योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 25 करोड़ का बजटीय उपबंध किया गया है।

केंद्र पर सहयोग न करने का आरोप

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि झारखंड का विकास अकेले राज्य के बस की बात नहीं है। इसमें केंद्र का आर्थिक सहयोग जरूरी है। वित्त मंत्री ने कहा कि अभी तक केंद्रीय करों में पांच हजार करोड़ और अनुदान का 11 हजार करोड़ अभी तक नहीं मिला। दूसरी ओर, केंद्र सरकार की अविवेकपूर्ण निर्णयों के कारण झारखण्ड के ऊपर घोर आर्थिक बोझ पड़ रहा है अथवा पड़ने वाला है।

उन्होंने कहा कि माल एवं सेवा कर के कर दर युक्तिकरण से झारखण्ड राज्य को प्रतिवर्ष 4 हजार करोड़ रुपये की क्षति हो रही है। इसी तरह मनरेगा का परिवर्तित नाम VB-G RAM G योजना के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 राशि के बंटवारे से झारखण्ड को लगभग प्रतिवर्ष 5 हजार 640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने वाला है। इसी तरह अनेकों प्रयास करने के बाद भी केंद्र सरकार द्वारा कोल कंपनियों के पास बकाया राशि 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये झारखण्ड को उपलब्ध नहीं कराया गया है।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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