Thursday, May 28, 2026

समाज को बांटना और तोड़ना, कांग्रेस की फितरत, यह षड्यंत्र सफल नहीं होने देंगे : बाबूलाल मरांडी

रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को बांटने और तोड़ने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया है। आदिवासी समागम का विरोध करने को लेकर बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्होंने इन दलों को चेताते हुए कहा कि समाज को बांटने और मूल आदिवासी अधिकारों को कमजोर करने की उनकी साजिश कतई सफल नहीं होगी। बाबूलाल मरांडी भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

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बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू में कोई अंतर नहीं है। बल्कि इनमें समानता है। ये प्रकृति की पूजा करते हैं और पेड़, पहाड़, पत्थर, जल, धरती माता की भी पूजा करते हैं। सरना, सनातन और हिंदू में ही जाति व्यवस्था है। यहां जातियों की अनेकों समूह हैं। यहां 36 कोटि देवी देवता हैं। आदिवासी समाज में देश के अंदर 700 से अधिक जातियां हैं, झारखंड में भी 32-33 जातियां हैं। अपने गांव घरों में इनकी अपनी अपनी देवी देवता हैं। यह जो विविधता में एकता है, इसका समावेश सनातन, हिंदू, सरना में है। जहां इतनी अधिक समानता है वहां पर कांग्रेस और jmm के लोग कहते हैं कि इन्हें हिंदू बनाया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि हिंदू बनाने का कहीं कोई परंपरा ही नहीं है। बनाए तो क्रिश्चन और मुसलमान जाते हैं। सरना, सनातन और हिंदू तो पैदाइशी होते हैं।

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास सभी को पता है। कांग्रेस का गठन करने वाले अंग्रेज रहे हैं। 1857 के सिपाही विद्रोह के बाद ही अंग्रेजों को लगने लगा कि अब देश को संभालना होगा तो एक सेफ्टी वाल्ब के रूप में कांग्रेस पार्टी का गठन किया गया। अंग्रेज ने समाज को विभाजित और तोड़कर, लोगों को आपस में लड़ा कर इस देश पर राज किया। कांग्रेस पार्टी तो उन्हीं के एक मानस पुत्र रहे हैं। इसलिए जब देश स्वतंत्र हुआ तो महात्मा गांधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी को खत्म कर देनी चाहिए परंतु कांग्रेस ने गांधी जी की बातों को अनसुना कर दिया। अंग्रेजों की “फूट डालो और राज करो” की संस्कृति पर ही कांग्रेस देश में लंबे वर्षों तक कार्य करती रही। अब जब देश से कांग्रेस की विदाई हो रही है तो यह पार्टी समाज को तोड़ने का नया-नया हथकंडा अपना रही है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा भाजपा व आरएसएस पर आदिवासियों को हिंदू बनाने का लगाया गया आरोप उसी हथकंडा का एक हिस्सा है। समाज को तोड़ना और कुर्सी प्राप्त करना तो कांग्रेस की फितरत है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो वोट बैंक की राजनीति के लिए आदिवासी समाज में विभाजन पैदा करने का काम कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पेसा कानून की नियमावली में आदिवासी परंपराओं और रूढ़िगत व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया गया है। जो लोग आदिवासी संस्कृति, आस्था और परंपराओं को बदलने का काम करते हैं, उन पर ये दल मौन रहते हैं। इसलिए कांग्रेस और झामुमो के मुँह से आदिवासी हित की बात शोभा नहीं देती।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जहां 32वां या सुदृढ़ीकरण कर आदिवासियों को क्रिश्चियन बनाया जा रहा है, कलमा पढ़ाकर किसी को मुसलमान बनाया जाता है, लोगों की संस्कृति, परंपरा, विश्वास, आस्था को मिटाने का काम किया जा रहा है, उस मुद्दे पर कांग्रेस और झामुमो के लोग कुछ नहीं बोलते हैं। वोट बैंक की राजनीति के लिए यहां के आदिवासी, जनजाति जो मूल समाज है उनको कैसे समाज से अलग किया जाए, उनमें अलगाव पैदा किया जाए, इसके लिए षड्यंत्र किया जा रहा है, इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। सत्ता में बैठे कांग्रेस और jmm के लोग समाज को सिर्फ बांटने तोड़ने का काम कर रहे हैं। इस प्रकार की नीतियां बहुत दिनों तक नहीं चलेगी। बहुत दिनों तक इन दलों ने बरगलाकर समाज को गुमराह किया। अब समाज जागरूक हो चुका है। समाज की अपनी मूल पहचान है, इसे समाज पहचान चुका है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जितनी भी जनजातियों की पूजा स्थल है, उसको संरक्षित, सुरक्षित और विकसित करने की जरूरत है। जगह-जगह पर सरना मसना, पहनाई की जमीन जमीन बर्बाद हो रही है, माफियाओं के चंगुल में जा रहा है। इसको बचाने और संरक्षित करने की जरूरत है, तभी संस्कृति बचेगी। जब झारखंड बना और हमारी सरकार बनी तो हमने ही जाहेरथान की घेराबंदी शुरू करवाई, मांझी थान बनवाने का काम शुरू हुआ। रघुवर दास की सरकार ने इस काम को आगे बढ़ाया। इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी उपस्थित रही।

एयर नाउ स्पेशल

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