Thursday, October 29, 2026

JPSC-2 घोटाला मामले में ईडी ने मांगी रिपोर्ट, 28 अधिकारियों की संपत्ति का मांगा ब्यौरा

रांची: केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने JPSC-2 घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच की दिसा में एक कदम और बढ़ा दिया है। इस मामले में ईडी ने आरोपित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से संबंधित संपत्ति के विस्तृत विवरण का ब्यौरा राज्य सरकार से मांग लिया है। ये कदम उन सभी अधिकारियों की पैतृक और घोषित संपत्ति की जांच के लिए उठाया गया है, जिनके खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया है।

ईडी ने JPSC-2 घोटाले में ECIR दर्ज करने के बाद अब मनी लॉन्ड्रिंग के बिंदु पर जांच तेज कर दी है। इसी सिलसिले में उसने झारखंड पुलिस और प्रशासनिक सेवा के 28 अधिकारियों की संपत्ति का ब्यौरा मांगने का पत्र राज्य सरकार को भेजा है। बताया जा रहा है कि यह ब्यौरा उनके द्वारा पहले घोषित की गई संपत्ति का विवरण भी शामिल करेगा।

जांच में शामिल हैं कुल 28 अधिकारी

ईडी द्वारा जानकारी मांगी गई उन अधिकारियों में पुलिस सेवा और प्रशासनिक सेवा दोनों के अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों में डिप्टी एसपी, DSP, राज्य प्रशासनिक सेवा, वित्त सेवा और सहकारिता अधिकारी जैसे पदों पर नियुक्त लोग हैं। सूची में शामिल कुछ नाम इस प्रकार हैं। जिसमें राधा प्रेम किशोर (DSP), बिनोद राम (राज्य प्रशासनिक सेवा), हरिशंकर बड़ाइक (राज्य प्रशासनिक सेवा), मुकेश कुमार महतो (DSP), संगीता कुमारी (वित्त सेवा), शैलश कुमार श्रीवास्तव (वित्त सेवा), कुमुद कुमार (सहकारिता पदाधिकारी)। कुल 28 अधिकारियों की सूची ईडी ने राज्य सरकार को भेजी है।

सीबीआई जांच और आरोपपत्र

ये कार्रवाई सीबीआई की JPSC-2 घोटाले में जांच के बाद दायर आरोप पत्र के आधार पर की जा रही है। सीबीआई ने इस घोटाले में कुल 60 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था, जिनमें अधिकारियों, परीक्षार्थियों और परीक्षकों के नाम शामिल हैं। इन सभी को ईडी ने ECIR में अभियुक्त बनाया है ताकि धन शोधन और अवैध संपत्ति अर्जन के पहलुओं की भी जांच हो सके।  राज्य सेवा और प्रशासनिक कर्मियों को सरकार में नियुक्ति के समय अपनी और पारिवारिक संपत्ति का ब्यौरा जमा करना होता है। इसके बाद हर साल संपत्ति का विवरण अपडेट करना होता है जिससे भ्रष्टाचार और धन शोधन की संभावनाओं पर नजर रखी जा सके। ईडी ने इसी उद्देश्य से आरोपित अधिकारियों द्वारा दी गई संपत्ति घोषणाओं का पूरा ब्यौरा मांगा है।

आगे की जांच जारी

ईडी की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही है और इस मामले में आगे भी जांच जारी है। अधिकारी अब भेजे गए संपत्ति विवरण का विश्लेषण करेंगे ताकि पता लगाया जा सके कि क्या आरोपितों ने अपने पद का दुरुपयोग कर किसी भी तरह से अवैध संपत्ति अर्जित की है या नहीं। JPSC-2 घोटाला झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में अनुचित और अवैध चयन से जुड़ा मामला है। इस मामले में परीक्षार्थियों के चयन, परीक्षकों की भूमिका और अधिकारियों के दखल के विषय में आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने इस जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया था और अब ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के बिंदु पर जांच कर रही है।

एयर नाऊ स्पेशल

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