रांची: रांची के नामकुम अंचल के टुंडुल इलाके में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेरफेर और अवैध दाखिल-खारिज मामले में अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई तेज हो गई है। इस मामले में तत्कालीन अंचल अधिकारी श्वेता वर्मा, तत्कालीन हल्का कर्मचारी दीपक कुमार और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ प्रीलिमिनरी इंक्वायरी (PE) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए मंत्रिमंडल एवं निगरानी विभाग से औपचारिक अनुमति मांगी गई है।
Highlights:
Air Now के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें:-
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई जांच
पूरा मामला झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद सामने आया। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट को आशंका है कि अंचल कार्यालय से सरकारी रिकॉर्ड गायब होने के पीछे बड़ा जमीन घोटाला हो सकता है।
यह विवाद टुंडुल क्षेत्र की कीमती जमीन से जुड़ा हुआ है। थॉमस साइमन साइरिल हंस नामक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि अंचल कार्यालय द्वारा भूमि के मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि संबंधित अधिकारी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने में आनाकानी कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें: रांची के लीवी बार एंड रेस्टोरेंट में मंगलवार तड़के लगी भीषण आग, लाखों का नुकसान
दस्तावेजों की कड़ियां जोड़ रही ACB
फिलहाल भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मामले से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के रिकॉर्ड में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। सूत्रों के अनुसार यदि PE की मंजूरी मिल जाती है और जांच में वित्तीय अनियमितता या घोटाले की पुष्टि होती है, तो ACB इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सकती है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।




