रांची: झारखंड के स्कूलों की बदहाल स्तिथि और रांची के जिला स्कूल में बुनियादी सुविधाओं पर हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान पर शनिवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर कि खंडपीठ ने स्कूलों में बुनयादी ढांचे की कमी, जर्जर भवनों और शिक्षकों के रिक्त पदों के मुद्दे को लेकर चिंता जताई।
इस मामले में खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए स्कूलों के जर्जर भवनों और बिना छत के संचालित स्कूलों कि सूची मांगी है। इस सूची में राज्य के उन स्कूलों की जानकारी होगी जो बिना छत, बिना बुनियादी सुविधाओं और जर्जर भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षकों के रिक्त पदों की स्तिथि पर भी अलग से रिपोर्ट मांगी गई है। मामले में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) की ओर से जल्द विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करने का आश्वासन दिया गया और साथ ही रिपोर्ट पेश करने के लिए समय की मांग की गई है।
इसके साथ खंडपीठ ने रांची के जिला स्कूल (अब सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) से संबंधित याचिका पर भी सुनवाई की। मामले में अधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को सभी संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाकर स्कूल की स्तिथि सुधारने के आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
हाईकोर्ट ने इन दोनों जनहित याचिका के विभिन्नता को देखते हुए दोनों याचिकाओं को अलग कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट करते हुआ कहा कि एक जनहित याचिका राज्य के कई स्कूलों से जुड़ा व्यापक मामला है। जबकि दूसरी जनहित याचिका केवल जिला स्कूल, रांची तक सीमित है। इसलिए अब दोनों याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई होगी।


