नई दिल्ली : एआई इम्पैक्ट समिट 16 फ़रवरी से 20 फ़रवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा. इस कार्यक्रम में टेक और एआई जगत के कई बड़े नाम भारत आएंगे. इसके अलावा 20 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति शामिल होंगे.
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एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को एक अहम वैश्विक मंच के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य समावेशी और प्रभावशाली एआई के भविष्य की दिशा तय करना है. समिट को तीन मुख्य स्तंभों पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस के आधार पर संचालित किया गया है.
अब तक तीन वैश्विक एआई समिट आयोजित हो चुके हैं. इसकी शुरुआत 2023 में एआई सेफ्टी समिट से हुआ था, जो ब्लेचली पार्क यूके में आयोजित हुआ था. इसके बाद अगले वर्ष दक्षिण कोरिया में एआई सोल समिट हुआ. पिछले साल फ़रवरी में फ़्रांस की राजधानी पेरिस में एआई एक्शन समिट आयोजित किया गया. नई दिल्ली में होने वाला एआई इम्पैक्ट समिट इस कड़ी का चौथा समिट होगा.
20 देशों के प्रमुख आएंगे भारत
समिट में 20 देशों के प्रमुख यानी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या उप राष्ट्रपति भाग लेने भारत आ रहे हैं. विदेश मंत्रालय के अनुसार इन देशों में भूटान – शेरिंग टोबगे, प्रधानमंत्री, बोलिविया – एडमंड लारा मोंटानो, उपराष्ट्रपति, ब्राज़ील – लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा, राष्ट्रपति, क्रोएशिया – आंद्रेय प्लेंकोविच, प्रधानमंत्री, एस्टोनिया – अलार कारिस, राष्ट्रपति, फ़िनलैंड – पेट्टेरी ऑरपो, प्रधानमंत्री, फ़्रांस – इमैनुएल मैक्रों, राष्ट्रपति, ग्रीस – क्यिरियाकोस मित्सोटाकिस, प्रधानमंत्री शामिल हैं.
इसके अलावा गुयाना – भरत जगदेव, उपराष्ट्रपति, कज़ाख़स्तान – ओल्झास बेक्टेनोव, प्रधानमंत्री, लिकटेंस्टाइन – प्रिंस एलोइस, मॉरीशस – डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम, प्रधानमंत्री, सर्बिया – अलेक्सांदर वुचिच, राष्ट्रपति, स्लोवाकिया – पीटर पेलेग्रिनी, राष्ट्रपति, स्पेन – पेद्रो सांचेज़ पेरेज़, राष्ट्रपति, श्रीलंका – अनुरा कुमार दिसानायके, राष्ट्रपति, सेशेल्स – सेबास्टियन पिल्ले, उपराष्ट्रपति, स्विट्ज़रलैंड – गी पारमेलिन, राष्ट्रपति, नीदरलैंड्स – डिक स्कोफ़, प्रधानमंत्री और यूएई – शेख ख़ालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस भी भाग लेंगे.
भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि इसके अलावा 45 से ज़्यादा देशों के मंत्रीस्तरीय प्रतिनिधिमंडल समिट में भाग लेंगे. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी विचार-विमर्श में शामिल होंगे.


