हजारीबाग: झारखंड का हजारीबाग जिला जो अपनी रामभक्ति और भव्य जुलूस के लिए देश भर में जाना जाता था, आज वो चार लोगों के लिए मौत का सबब बन गया। रामनवमी के जुलूस के दौरान परंपरागत अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन के दौरान चार नौजवान प्रिंस कुमार, योगेश जयसवाल, बबन राम और अभिषेक वर्मा की मौत हो गई। वहीं मिली जानकारी के मुताबिक, लगभग 750 से ज्यादा लोग घायल हैं, जिनमें से कइयों की हालत नाजुक बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अब जुलूस में श्रद्धा से ज्यादा नशे का सुरूर और हथियारों की नुमाइश हावी होने लगी थी जिस कारण ये दुर्घटनाएँ हुई।
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क्या कारण है ऐसी घटनाओं के पीछे?
शहर में हजारों जवान और अधिकारी तैनात थे, लेकिन भीड़ के उग्र व्यवहार के आगे कानून बौना नजर आया। ऐसा इसलिए क्यूंकि जब भी प्रशासन हथियारों के प्रदर्शन या अनुशासन पर सख्ती बरतने की कोशिश करता है, तो विभिन्न समितियां एकजुट होकर विरोध पर उतर आती हैं। रामनवमी जैसे त्योहार में पब्लिक जिस तरह से व्यवहार करती है, जिस तरह कई दल हर छोटी बात को बतंगड़ बनाने के लिए उतावला रहते हैं, उस बीच प्रशासन का हथियार प्रदर्शन पर सख्ती बरतना संभव ही नहीं है। हथियार प्रदर्शन और सबसे आगे रहने की जिद अखाड़ों के बीच खूनी संघर्ष का माहौल पैदा कर देता है। जिस कारण जुलूस के दौरान ही युवक आपस में मारपीट करने, डीजे व शोभा यात्रा में शामिल वाहनों में तोड़ फोड़ करने लगते हैं।
इस बार लोग क्यूँ हुए उग्र?
हजारीबाग में इस बार माहौल और लोग पहले से ज्यादा उग्र और उत्तेजित नजर आए। ऐसा इसलिए क्यूंकि हजारीबाग की रामनवमी इस बार की कई तरह विवादों में घिरी रही। एक तरफ जहां डीजे बैन की अफवाह और झारखंड विधानसभा पटल पर इसके विरोध ने माहौल को और गरम कर दिया। वहीं दूसरी और मंगला जुलूस में प्रसाशन की सख्ती बरतने पर विरोध और झड़प के बीच पत्थरबाजी जैसी घटनाओं ने जनता को और उग्र कर दिया। जो बची खुची कसर थी वो राजनैतिक पार्टियों के नेताओं ने पूरी कर दी। रामनवमी के दौरान इन घटनाओं से बने माहौल के बीच नेताओं द्वारा लाठियों और तलवारों के वितरण ने आग में घी का काम किया और आस्था और उल्लास भरी रामनवमी को शक्ति प्रदर्शन पर केंद्रित कर दिया। इसके साथ ही जिले में हुए अन्य अप्रिय घटनाओं से भी माहौल खराब हुआ।
अप्रिय घटनाओं से कैसे बच जाए?
जरूरी है कि समय रहते ऐसे धार्मिक आयोजनों को लेकर समितियां खुद जवाबदेही तय करे और खुद के लिए सख्त नियम तैयार करे। साथ ही प्रशासन बिना किसी दवाब के हथियार के प्रदर्शन पर रोक लगाए। शराब पीकर जुलूस में शामिल होने पर पूरी तरह से रोक लगाया जाए। तब कहीं जाकर इस तरह के अप्रिय घटनाओं में आम लोगों की मौत पर अंकुश लगना संभव है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में हमें और भी बुरा देखना पड़ सकता है।


