रांची : पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम-1996 के तहत नियमावली बनाने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आज मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में पेसा नियमावली का मसौदा रखा जाएगा। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को निर्धारित की। कोर्ट ने राज्य में बालू घाटों एवं लघु खनिजों के आवंटन पर पूर्व में लगाई गई रोक को बरकरार रखा।
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बता दें कि बुद्धिजीवी मंच की ओर से दायर अवमानना याचिका मामले में हुई पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली को कैबिनेट कोऑर्डिनेशन कमेटी के पास भेजा था, कमेटी ने कुछ त्रुटियां बताई थी। इन त्रुटियों को दूर कर एक सप्ताह में पंचायती राज विभाग द्वारा फिर से कैबिनेट कोऑर्डिनेशन कमिटी को भेजा जाएगा। इससे पहले खंडपीठ ने सरकार से कहा था कि जनहित याचिका में कोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को आदेश पारित कर पेसा नियमावली लागू करने के लिए राज्य सरकार को दो माह का समय दिया था. लेकिन अब तक पेसा नियमावली लागू नहीं हुई है। पेसा नियमावली लागू करने में जो बाधाएं हैं उन्हें जल्दी दूर किया जाए।
क्या है मामला
वर्ष 1996 में केंद्र सरकार ने पेसा कानून लागू किया था. इसका उद्देश्य राज्य के शिड्यूल एरिया में आदिवासियों के हितों की सुरक्षा करना था, लेकिन एकीकृत बिहार तथा झारखंड गठन से लेकर अब तक राज्य सरकार द्वारा कानून के तहत नियमावली नहीं बनायी गयी है. वर्ष 2019 तथा 2023 में नियमावली का ड्रॉफ्ट तैयार किया गया था, लेकिन लागू नहीं किया गया. जब लागू नहीं किया गया, तो हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी. बाद में हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर हुई है।


