Thursday, July 23, 2026

रांची यूनिवर्सिटी सीनेट का विस्तार: लोकभवन की मुहर के बाद सदस्यों के मनोनयन की घोषणा, अधिसूचना जल्द होगी जारी

रांची: रांची विश्वविद्यालय (RU) के शैक्षणिक और प्रशासनिक भविष्य को नई दिशा देने के लिए सीनेट के पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। राजभवन (लोकभवन) से आधिकारिक हरी झंडी मिलने के बाद अब नए सदस्यों के मनोनयन की घोषणा कर दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन अगले 24 से 48 घंटों के भीतर इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है।

शिक्षा से उद्योग तक विशेषज्ञों का चयन

इस बार सीनेट के विस्तार में अनुभव और आधुनिकता का विशेष तालमेल देखने को मिल रहा है। विश्वविद्यालय ने रोटेशन प्रणाली और विभागीय नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए समाज के विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया है। इसमें न केवल शिक्षा जगत के बड़े नाम शामिल हैं, बल्कि औद्योगिक और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले चेहरों को भी तरजीह दी गई है। सीनेट में इस बार कई प्रतिष्ठित चेहरों को शामिल किया गया है, जो विश्वविद्यालय के नीतिगत निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। रोटेशन के आधार पर कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रमुख प्राचार्यों को चुना गया है:
डॉ. राजकुमार शर्मा: प्राचार्य, डोरंडा कॉलेज
डॉ. विनिता सिंह: प्राचार्या, रांची वीमेंस कॉलेज
डॉ. मंजु कुमारी: गृह विज्ञान विभाग
डॉ. हीरानंदन प्रसाद: हिंदी विभाग
डॉ. एमएन जुबैरी: कॉमर्स विभाग

विश्वविद्यालय को औद्योगिक जगत से जोड़ने और रोजगारोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से इन दिग्गजों को शामिल किया गया है:
पुनीत पोद्दार: सीएमडी, प्रेमसंस ग्रुप
उमेश साह: बीएसएनएल
डॉ. सीडी सिंह: पूर्व जीएम, सेल (SAIL)
रोहित दुबे: युवा उद्यमी

राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र के विस्तार के लिए पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव का चयन किया गया है।

रोटेशन प्रणाली का पालन और पारदर्शिता पर जोर

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, सीनेट के गठन में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। रोटेशन प्रणाली के तहत अलग-अलग संकायों और कॉलेजों को मौका दिया गया है ताकि पूरे विश्वविद्यालय क्षेत्र का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

क्यों अहम है यह पुनर्गठन?

सीनेट विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था होती है। बजट पास करने से लेकर नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत और शैक्षणिक सुधारों तक, हर बड़े फैसले पर सीनेट की मुहर अनिवार्य होती है। नए सदस्यों के आने से रांची विश्वविद्यालय में अटके हुए कई प्रोजेक्ट्स और नीतिगत फैसलों में तेजी आने की उम्मीद है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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