मुंबई: देश में फिल्मों और ओटीटी कंटेंट को लेकर एक बार फिर सामाजिक जिम्मेदारी पर बहस तेज हो गई है। अभिनेता मनोज बाजपेयी की आने वाली फिल्म घूसखोर पंडत का शीर्षक सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विरोध अब प्रदर्शन, कानूनी नोटिस और हाईकोर्ट याचिका तक पहुंच चुका है।
Highlights:
टीज़र रिलीज़ के बाद शुरू हुआ विवाद
विवाद तब शुरू हुआ, जब फिल्म का टीज़र हाल ही में रिलीज़ किया गया। टीज़र में मनोज बाजपेयी को दिल्ली पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार में दिखाया गया है, जिन्हें सिस्टम के भीतर कथित घूसखोरी और भ्रष्ट छवि के चलते पंडत कहा जाता है। जैसे ही फिल्म का नाम सामने आया, लोगों ने सवाल उठाया कि किसी एक किरदार को दिखाने के लिए पूरे समुदाय से जुड़ा शब्द क्यों चुना गया।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
टीज़र सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी फूट पड़ी। यूज़र्स ने नेटफ्लिक्स इंडिया और फिल्म निर्माताओं को टैग करते हुए आरोप लगाया कि एक सम्मानित धार्मिक और सामाजिक पहचान को सीधे घूसखोर जैसे शब्द से जोड़ना पूरे समुदाय को बदनाम करने जैसा है। कई लोगों ने इसे सेलेक्टिव टारगेटिंग बताते हुए समानता और सम्मान के सवाल उठाए।
सड़कों पर उतरा विरोध
ऑनलाइन विरोध धीरे-धीरे सड़कों तक पहुंच गया। अलग-अलग शहरों में लोगों ने प्रदर्शन किए और हाथों में पोस्टर लेकर नारे लगाए। पोस्टरों पर लिखा था भ्रष्ट व्यक्ति को दिखाओ, समुदाय को नहीं। घूसखोरी किसी जाति की पहचान नहीं। टाइटल बदलो, सम्मान बचाओ। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे फिल्म की कहानी के विरोध में नहीं, बल्कि उसके शीर्षक के खिलाफ हैं।
नोटिस भी भेजा गया
विवाद के बीच मुंबई के वकील आशुतोष दुबे ने नेटफ्लिक्स और फिल्म के निर्देशक को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में फिल्म के शीर्षक को अपमानजनक, समुदाय-विरोधी, असंवैधानिक और सामाजिक रूप से भड़काऊ बताया गया है। नोटिस में मांग की गई है कि फिल्म का शीर्षक तुरंत बदला जाए, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल
अधिवक्ता विनीत जिंदल ने इस विवाद को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। याचिका में फिल्म की ओटीटी रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म का शीर्षक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है और ऐसे शीर्षक सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
नेटफ्लिक्स और मेकर्स की चुप्पी
अब तक इस पूरे विवाद पर नेटफ्लिक्स इंडिया या फिल्म के निर्माताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। न ही टाइटल बदलने को लेकर कोई संकेत दिया गया है। यह चुप्पी भी अब चर्चा का विषय बन चुकी है। फिल्म का निर्देशन रितेश शाह ने किया है। फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ नुशर्रत्त भारुचा, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय, श्रद्दा दास, दिव्या दत्ता और किकू शारदा जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज़ डेट अभी घोषित नहीं की गई है।
आज़ादी बनाम सामाजिक जिम्मेदारी
इस विवाद ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की आज़ादी और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच की बहस को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कला और सिनेमा को सिस्टम पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन किसी पूरे समुदाय को नकारात्मक रूप में पेश करना संवैधानिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील मुद्दा बन सकता है। घूसखोर पंडितअब सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी बहस का केंद्र बन चुकी है। सड़कों से लेकर अदालत तक पहुंचे इस विवाद में अब सबकी नजरें फिल्म निर्माताओं के फैसले और कोर्ट के रुख पर टिकी हैं।


