Thursday, July 23, 2026

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सरहुल के मौके पर कहा – समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी

रांची: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक कल्पना सोरेन आज आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर, करमटोली, रांची पहुंचे। मुख्यमंत्री ने प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर यहां आयोजित महोत्सव में सम्मिलित होकर पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की तथा समस्त झारखंड वासियों के कल्याण की प्रार्थना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि आज उत्साह और हर्षोल्लास का दिन है। आदिवासी समुदाय के लिए आज एक बहुत बड़ा क्षण है। हर वर्ष हम लोग इस प्रांगण में मिलते रहे हैं, आगे भी आते रहेंगे, आप सभी से मिलते भी रहेंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार हमारे पूर्वजों ने हमें सरहुल महोत्सव जैसी समृद्ध परंपराओं के निर्वाह की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर दिया है, हम आने वाले समय में अपनी पीढ़ी के कंधों पर इन परंपराओं के निर्वहन का जिम्मा सौंपेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति से बड़ी पूजा और कुछ नहीं है। प्रकृति में ही सभी चीजों का सृजन और विलय होता है।

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प्रकृति है तो मानव जीवन है

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर प्रकृति नही होता तो मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। अगर प्रकृति ना होती तो संसार में कोई जीव-जंतु भी नहीं होती। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी प्रकृति के द्वारा रचाई और बसाई गई व्यवस्था है और इस व्यवस्था के प्रति आदिवासी समूह की अटूट आस्था है। मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मांदर बजाकर आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर में आयोजित सरहुल महोत्सव-2026 की खुशियों को दोगुनी कर दी.

समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाना 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि प्रकृति से हम सभी को जुड़ने की जरूरत है। प्रकृति जब सुरक्षित रहेगी तब हमारा अस्तित्व भी रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में आपाधापी के बीच जीवनयापन हो रहा है। हमारे पूर्वजों ने हमें बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से दीर्घकालीन सोच के साथ कुछ ऐसी व्यवस्थाएं बनाई हैं जिसके तहत हम लोग एक साथ एक मंडप में एक छत के नीचे, एक पेड़ के नीचे एकत्रित होते हैं। इन सभी व्यवस्थाओं को हमें प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। हम सभी लोग प्रकृति की रक्षा करें और अपने जीवन को सुरक्षित करें.

सरहुल की शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज के पावन अवसर पर सिर्फ मानव ही नहीं बल्कि प्रकृति भी झूम रहा है। निश्चित रूप से हमें गर्व होना चाहिए कि हम एक ऐसी व्यवस्था के उपासक हैं, जहां से जीवन शुरू होता है. आज के इस पावन अवसर पर हमारी ओर से आपको एवं आपके परिवारजनों सहित समस्त राज्यवासियों को प्रकृति पर्व सरहुल की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं। मौके पर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की एवं विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपनी ओर से झारखंड वासियों को प्रकृति पर्व सरहुल महोत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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