Thursday, July 23, 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बीजेपी के गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मांगी माफ़ी

नई दिल्ली : अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच सोशल मीडिया पर छिड़ी जुबानी जंग अब कानूनी मोड़ ले चुकी है. समाजवादी पार्टी ने दावा किया है कि समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष केके पाल की ओर से भेजे गए लीगल नोटिस के जवाब में निशिकांत दुबे ने खेद जताते हुए माफी मांगी है. हालांकि, जवाबी नोटिस में बीजेपी सांसद ने साफ किया है कि यह केवल सौहार्द बनाए रखने के लिए व्यक्त किया गया खेद है, इसे किसी भी तरह से गलती या मानहानि स्वीकार करना नहीं माना जाए.

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सपा ने पोस्ट कर किया दावा

सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि “बहुत बड़े शूरवीर बने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बिना शर्त समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष केके पाल से माफी मांगी है. अब उन्हें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी माफी मांगनी चाहिए.”

5 जुलाई को निशिकांत दुबे का पोस्ट

दरअसल विवाद की शुरुआत बीते 5 जुलाई को हुई, जब निशिकांत दुबे ने एक्स पर एक पोस्ट रीशेयर करते हुए लिखा, “टिन्नू टीपू से ही तो बात कर रहा था?” दरअसल टिन्नू का मतलब है रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, जो राम मंदिर दान चोरी मामले का मुख्य आरोपी है. निशिकांत दुबे के पोस्ट का इशारा इसी टिन्नू यादव की ओर था, और उन्होंने “टीपू” कहकर सीधा निशाना अखिलेश यादव पर साधा.

पोस्ट से भड़के अखिलेश यादव

इस टिप्पणी पर अखिलेश यादव भड़क गए. उन्होंने भगवान राम की मर्यादा और संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए निशिकांत दुबे को पोस्ट हटाने के लिए महज 10 मिनट का अल्टीमेटम दिया, वरना FIR दर्ज कराने की चेतावनी दी. लेकिन दुबे ने पोस्ट नहीं हटाई. इसके बाद 7 जुलाई को समाजवादी अधिवक्ता सभा के अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल ने निशिकांत दुबे को पांच पन्नों का मानहानि कानूनी नोटिस भेज दिया.

नोटिस में आरोप लगाया गया कि दुबे ने जानबूझकर अखिलेश यादव और सपा के प्रति नफरत फैलाई, जिससे पार्टी और उसके अध्यक्ष की छवि को नुकसान पहुंचा. नोटिस में यह भी कहा गया कि टिप्पणी जातिगत भी है, क्योंकि अखिलेश यादव ओबीसी समुदाय से आते हैं. दुबे को दो हफ्ते के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने को कहा गया, अन्यथा आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई.

अखिलेश यादव का इंकार

दूसरी ओर, अखिलेश यादव ने टिन्नू यादव से किसी भी तरह की फोन बातचीत को पूरी तरह झूठा करार दिया और भाजपा नेताओं समेत इस दावे को फैलाने वाले सभी लोगों के खिलाफ FIR कराने की चेतावनी दी. यह पूरा प्रकरण अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में गरमाया हुआ है, और आने वाले दिनों में इसका आगे क्या कानूनी नतीजा निकलता है, इस पर सबकी नजर टिकी है.

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