मुंबई: पिछले दो वर्षों से मुंबई और खासकर बॉलीवुड पर जिस नाम की सबसे ज्यादा दहशत रही है, वह है लॉरेंस बिश्नोई। रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग को जांच एजेंसियां सिर्फ एक धमकी नहीं, बल्कि बिश्नोई गैंग में आए बड़े बदलाव का संकेत मान रही हैं। एक समय लॉरेंस बिश्नोई गैंग को एक संगठित और केंद्रीकृत नेटवर्क माना जाता था। जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई गैंग का रणनीतिक नियंत्रण करता था, जबकि बाहर उसका भाई अनमोल बिश्नोई और करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़ पूरे नेटवर्क को संभालते थे। देश और विदेश में फैले इस गैंग की गतिविधियों में वसूली, धमकी और शूटिंग जैसी वारदातें शामिल थीं। मुंबई और बॉलीवुड इस गैंग के लिए बड़ा टारगेट थे, जहां पैसा भी था और डर का असर भी दूर तक जाता था।
Highlights:
अनमोल की गिरफ्तारी
नवंबर 2024 में जब अनमोल बिश्नोई को अमेरिका में हिरासत में लिया गया, तभी से गैंग में तनाव बढ़ने लगा। अनमोल के केस को संभालने की जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ पर थी। लॉरेंस को उम्मीद थी कि कानूनी प्रक्रिया और जमानत समय पर पूरी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नवंबर 2025 में अनमोल बिश्नोई को भारत डिपोर्ट कर दिया गया और तिहाड़ जेल भेज दिया गया। यहीं से लॉरेंस और गोल्डी के रिश्ते पूरी तरह बिगड़ गए। अनमोल के जेल जाने के बाद लॉरेंस बिश्नोई को लगा कि उसके भाई को जानबूझकर या लापरवाही से फंसाया गया है। इसके बाद 2025 में बिश्नोई गैंग आधिकारिक तौर पर दो हिस्सों में बंट गई। एक धड़ा गोल्डी बराड़ का था, जिसके साथ रोहित गोदारा जैसे नाम जुड़े। दूसरा धड़ा जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का रहा था। जिसके साथ उसके पुराने भरोसेमंद लोग धीरे-धीरे कम होते चले गए। इस टूट का असर सड़कों पर भी दिखा। अक्टूबर से दिसंबर के बीच गैंग वॉर में कम से कम तीन हत्याएं हुईं। इन मामलों की कड़ियां कैलिफोर्निया, दुबई और चंडीगढ़ तक जुड़ी पाई गईं। दोनों गुटों ने सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे को खुली धमकियां दीं। जो सोशल मीडिया कभी गैंग की ताकत दिखाने का जरिया था, वही अब उसके बिखराव का सबूत बन गया।
बॉलीवुड पर हमलों का बदला पैटर्न
अप्रैल 2024 में सलमान खान के बांद्रा स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग उस दौर की थी, जब लॉरेंस और गोल्डी एक साथ थे। उस हमले की जिम्मेदारी लेने वाले पोस्ट में लॉरेंस, गोल्डी, रोहित गोदारा और काला जठेड़ी जैसे नाम थे। मुंबई पुलिस की चार्जशीट में भी लॉरेंस को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया। लेकिन छह महीने बाद बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में तस्वीर बदली हुई थी। इस बार सोशल मीडिया पोस्ट और चार्जशीट में अनमोल बिश्नोई का नाम सामने आया, जबकि लॉरेंस का नाम गायब था। इससे साफ हो गया कि गैंग के भीतर ताकत के केंद्र बदल चुके हैं।
रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी लेने वाले पोस्ट में एक और एकमात्र बिश्नोई गैंग की बात कही गई, लेकिन जिन नामों का जिक्र था, वे नए थे शुबहम लोंकर, आरजू बिश्नोई, हरी बॉक्सर और हरमन शांडू। यह पोस्ट बाहर से एकता दिखाने की कोशिश था, लेकिन असल में यह बदले हुए नेतृत्व का संकेत था।
शुबहम लोंकर एक नया चेहरा
शुबहम लोंकर महाराष्ट्र के अकोला का रहने वाला है। बताया जाता है कि वह कभी सेना में भर्ती होना चाहता था, लेकिन असफल होने के बाद उसे देश के लिए काम का हवाला देकर लॉरेंस बिश्नोई से जोड़ा गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में शामिल शूटरों के लिए पुणे में ठिकाने की व्यवस्था शुबहम ने की थी। कहा जा रहा है कि वह इस समय चीन में छिपा है, लेकिन वहीं से गैंग के ऑपरेशन चला रहा है। आरजू बिश्नोई, जिसका असली नाम नवीन कुमार है, लॉरेंस बिश्नोई का पुराना और भरोसेमंद साथी माना जाता है। वह पंजाब के फाजिल्का जिले का रहने वाला है। उसका नाम यह दिखाता है कि लॉरेंस का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अब वह अकेला फैसला लेने वाला नेता नहीं रहा।
बिखरा हुआ लेकिन खतरनाक नेटवर्क
आज बिश्नोई गैंग एक संगठित संगठन से ज्यादा बिखरे हुए नेटवर्क की तरह काम कर रहा है। कई छोटे-छोटे सरगना अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि खतरा अब पहले से ज्यादा अनिश्चित और ज्यादा खतरनाक हो गया है। रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग सिर्फ एक फिल्ममेकर को डराने की कोशिश नहीं थी, बल्कि यह अंडरवर्ल्ड के बदलते पावर स्ट्रक्चर का ऐलान था। आज बिश्नोई गैंग कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन खत्म नहीं। हर नई वारदात यह सवाल छोड़ जाती है कि अगला निशाना कौन होगा और आदेश किस धड़े से आया होगा।


