Thursday, July 23, 2026

बिहार चुनाव 2025: अमित शाह ने घटाया NDA का टारगेट, 225 से 160 सीटों पर क्यों आई बात?

बिहार : बिहार का चुनाव नजदीक है। मैदान गर्म है। नेताओं के बयान और रणनीतियां रोज़ बदल रही हैं। कल तक जो बात थी कि NDA का 225 सीट जीतने का टारगेट आज वो 160 पर आ गया है।

बड़ा सवाल यही है कि आखिर अमित शाह ने ऐसा क्यों किया और इसका असर किस पर पड़ेगा। 27 सितंबर को अररिया के फारबिसगंज में गृह मंत्री अमित शाह ने रैली की। वहां उन्होंने लोगों से कहा कि इस बार चार दिवाली मनानी है। पहली अयोध्या में रामलला के लौटने की खुशी में। दूसरी, जीविका दीदियों के खाते में 10,000 रुपए आने की खुशी में। तीसरी, 395 सामान पर जीएसटी में कमी की खुशी में। और चौथी, बिहार में NDA को 160 सीट जिताने की खुशी में।

NDA का बदलता लक्ष्य 

यानी साफ कर दिया कि इस बार टारगेट है 160 से ज्यादा सीटें। जबकि इसके एक दिन पहले पटना में भाजपा दफ्तर में हुई मीटिंग में शाह ने कहा था कि लक्ष्य है 225 सीट। और तो और, अक्टूबर 2024 में नीतीश कुमार की अध्यक्षता में NDA की बैठक में भी यही टारगेट फिक्स हुआ था कि 225। JDU ने नारा दिया था “2025 में 225 और फिर से नीतीश।” उसके बाद हर सभा, हर पोस्टर, हर बयान में यही टारगेट दोहराया गया। लेकिन अचानक शाह ने इसे घटा क्यों दिया? पहला कारण है—जमीनी हकीकत। अमित शाह हवा में बात करने वाले नेता नहीं हैं। उनकी राजनीति हमेशा कैलकुलेशन पर चलती है। बिहार में भी उन्होंने रिसर्च और सर्वे के बाद 160 सीट का आंकड़ा रखा। क्योंकि यहां विपक्ष मजबूत है। 2010 में NDA ने 206 सीट जीती थीं, लेकिन तब विपक्ष बिखरा हुआ था। कांग्रेस अलग, लेफ्ट अलग, लालू अलग। अभी महागठबंधन एकजुट है। कांग्रेस, लेफ्ट और आरजेडी सब साथ हैं। उनके पास जातीय समीकरण भी है। ऊपर से मुकेश सहनी जैसे छोटे खिलाड़ी और प्रशांत किशोर जैसे नए फैक्टर भी मौजूद हैं।

सर्वे रिपोर्ट्स के अनुसार

दूसरा कारण है सर्वे रिपोर्ट, रिपोर्ट्स कह रही हैं कि भाजपा के आंतरिक सर्वे में साफ दिखा कि 225 सीटों का दावा जमीन पर फिट नहीं बैठता। वोट वाइब की रिपोर्ट बताती है कि NDA 36.2%, महागठबंधन 35.8% और प्रशांत किशोर को 8.7% वोट मिल सकता है। यानी मुकाबला कांटे का है। बस 0.4% का अंतर। ऐसे में शाह ने 160 सीट का लक्ष्य रखकर अपने कार्यकर्ताओं को यथार्थ के करीब रहने का संदेश दिया है। तीसरा कारण है, लोकसभा चुनाव का सबक। 2024 में भाजपा ने 400 पार का नारा दिया था। विपक्ष ने इसे संविधान बदलने से जोड़ दिया। नतीजा, भाजपा को नुकसान हुआ। शाह इस बार वैसी गलती नहीं करना चाहते। अगर 225 सीट की बात जारी रखते तो जनता के बीच डर बैठ सकता था कि भाजपा बिहार पर पूरी तरह कब्जा करना चाहती है। नीतीश के समर्थकों को भी शंका हो सकती थी कि भाजपा अपना सीएम बनाना चाह रही है। इसलिए शाह ने 160 का आंकड़ा चुना जो दो तिहाई बहुमत से थोड़ा नीचे है। ताकि सहयोगियों में कोई कन्फ्यूजन न हो।

लोकसभा चुनाव 2024 का सबक और ‘400 पार’ का असर

अब सवाल है कि शाह ने यह टारगेट पब्लिकली क्यों बताया? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इससे कार्यकर्ताओं को अलर्ट मैसेज गया है। अगर 225 का टारगेट रहता तो ग्राउंड लेवल पर लोग लापरवाह हो जाते। जैसा लोकसभा चुनाव में 400 पार के नारे के बाद हुआ था। लेकिन 160 का यथार्थवादी टारगेट कार्यकर्ताओं को मेहनत करने पर मजबूर करेगा। पार्टी के भीतर भी इसका असर है। इस समय भाजपा में बाहर से आए नेताओं का दबदबा बढ़ा है। पुराने खांटी कार्यकर्ताओं में निराशा है। शाह का यह कदम उन्हें जगाने की कोशिश है कि सत्ता बचानी है तो मेहनत करनी होगी।

2020 के चुनाव से सीख और इस बार की चुनौती

अब बात करते हैं 2020 की। NDA ने 200 सीटों का लक्ष्य रखा था। नीतीश ने फरवरी 2020 में कहा था कि NDA 200 से ज्यादा सीट जीतेगा। भाजपा और जदयू नेताओं ने भी यही दावा किया। लेकिन रिजल्ट आया—125 सीट। बहुमत से सिर्फ 3 सीट ज्यादा। भाजपा को 74, जदयू को 43, HAM और VIP को 4-4 सीटें मिलीं। यानि टारगेट और रिजल्ट में भारी अंतर रहा। शायद इस बार शाह वही गलती नहीं दोहराना चाहते। अब असर क्या होगा? NDA के अंदरुनी समीकरण पर। सीट बंटवारे की बात चल रही है। शाह का ये बयान सहयोगियों को मैसेज है कि लड़ाई आसान नहीं है। सबको समझौता करना पड़ेगा। भाजपा ये दिखाना चाहती है कि उसका मकसद पार्टनर्स को दबाना नहीं है, बल्कि गठबंधन को मजबूत रखना है।

महागठबंधन की प्रतिक्रिया और मनोबल पर असर

महागठबंधन पर भी असर होगा। वे कहेंगे कि भाजपा को हार का डर है, इसलिए अब टारगेट घटा रही है। इससे उनके कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। जनता भी सोच सकती है कि भाजपा को पहले जैसा भरोसा नहीं है। अमित शाह ने बड़ा दावा नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ा टारगेट चुना है। इससे भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को जगाना चाहती है। सहयोगियों को समझौते का मैसेज देना चाहती है। और विपक्ष की हवा थोड़ी काटना चाहती है। लेकिन इसका असर क्या होगा ये चुनाव नतीजे ही बताएंगे।

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एयर नाऊ स्पेशल

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