नई दिल्ली : भारतीय चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण के परिणाम स्वरूप कई राज्यों में मतदाताओं की संख्या में भारी कमी आई है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और केरल सहित कुल 6 राज्यों की अंतिम सूची जारी होने के बाद, वोटर्स की कुल संख्या में 1 करोड़ से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। प्रतिशत के लिहाज से अंडमान-निकोबार में सबसे अधिक 16.87% और छत्तीसगढ़ में 11.77% की कटौती हुई है, जबकि संख्या के मामले में मध्य प्रदेश से सर्वाधिक 34 लाख और राजस्थान से 31 लाख नाम हटाए गए हैं। यह गिरावट मुख्य रूप से सूची से मृत, स्थानांतरित और अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाने के कारण हुई है।
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असम और बिहार में पंजीकरण की नई स्थिति
असम में विशेष पुनरीक्षण (SR) 2026 के बाद जारी फाइनल लिस्ट में कुल मतदाताओं की संख्या अब 2.49 लाख रह गई है, जिसमें से लगभग 2.43 लाख नाम हटाए गए हैं। इस नई सूची में महिला और पुरुष मतदाताओं की भागीदारी लगभग बराबर (1.24-1.24 लाख) है और 343 थर्ड-जेंडर वोटर भी शामिल हैं। वहीं, इस प्रक्रिया के पहले चरण में बिहार की सूची को अपडेट किया गया था, जहाँ अब कुल 7.42 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। चुनाव आयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और किसी भी अयोग्य या विदेशी नागरिक का नाम सूची में न रहे।
21 साल बाद गहन सुधार की आवश्यकता
यह विशेष अभियान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 1951 से 2004 तक तो नियमित अंतराल पर ऐसे सुधार हुए, लेकिन पिछले 21 वर्षों से यह प्रक्रिया लंबित थी। इस लंबे समय में लोगों के पलायन, मृत्यु और दोहरे पंजीकरण जैसी कई विसंगतियां पैदा हो गई थीं, जिन्हें दूर करने के लिए बीएलओ (BLO) ने घर-घर जाकर सत्यापन किया है। वर्तमान में 12 में से 9 राज्यों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की अंतिम मतदाता सूची आना अभी बाकी है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और शुद्धता को बनाए रखना है।


