हेल्थ डेस्क : सोनम वांगचुक उर्फ फुनसुक वांगडु, दोनों नाम इसलिए इस्तेमाल किये क्योंकि कुछ होंगे जो शायद सोनम वांगचुक को नहीं जानते होंगे, लेकिन वो 3 इडियट्स के फुनसुक को जरूर जानते होंगे। बहरहाल खबर ये है की, सोनम वांगचुक जो 18 दिनों से अनशन पर है और अब उनकी तबीयत गंभीर हो गई है। उनका 18 दिनों में 8 किलो से ज़्यादा वजन घट गया। इस पूरी घटना में अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर एक इंसान की बॉडी कितने दिन में टूटती है, और उसपर क्या क्या असर पड़ता है।
सबसे पहले तो ये समझना जरूरी है कि एक दिन में किसी भी मनुष्य के शरीर को ज़्यादा असर नहीं पड़ता। हाँ मगर भूख के कारण वो ज़्यादा थका हुआ महसूस करता है, ज़्यादा चिढ़ता है। लेकिन मामला 2-3 दिन के बाद बिगड़ता है, ऐसे में इंसान का शरीर बॉडी में प्रेजेंट ग्लूकोस का इस्तेमाल करता है। दरअसल ह्यूमन बॉडी में ऐसी स्थिति में लड़ने के लिए लिवर के पास पहले से ग्लूकोस, और ग्लाइकोजन होता है जो ब्रेक होता है। इस फेज को हम ABSORTIVE PHASE भी कहते हैं।
लेकिन उसमे भी पहले बॉडी आपने जो लास्ट मील लिया होता है, उससे ग्लूकोस लेता है। लेकिन जब समय बीतता जाता है, तो फिर बॉडी लिवर के पास मौजूद ग्लूकोस को इस्तेमाल करने लगता है। 5-6 दिन होते ही बॉडी कमजोर पड़ने लगती है और जब 8-10 दिन होते हैं, तो बॉडी खाने को भूल जाती है, यानि भूख लगना बंद हो जाता है, बॉडी को लगता है की अब बाहर से खाना नहीं मिलेगा। और फिर उसके बाद बॉडी पूरी तरह से कमजोर पड़ जाती है।
ऐसे में इंसान की जान पर भी खतरा बढ़ने लगता है, और सिर्फ उपवास में रहना ही समस्या की बात नहीं होती बल्कि, उसके बाद भी होती है। इतने दिन भूखे रहने के बाद किसी को भी एक दम से खाना नहीं खाना चाहिए, बहुत मुश्किलें होती हैं। जब भी ऐसा होता है, तो सलाह दी जाती है की डॉक्टर्स की निगरानी में ही उपवास धीरे धीरे तोड़ना चाहिए। और नॉर्मल होने पर फिर आप सामान्य खाना कहा सकते हैं।


