Tuesday, July 21, 2026

हताशा की वर्दी और हनुमान चालीसा पढ़ते भूत झारखंड की कानून-व्यवस्था का असली चेहरा : अंबा प्रसाद

रांची : कांग्रेस नेता व बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रसासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. गुरूवार को राजधानी रांची के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि आज पूरे झारखंड की जनता अपराधियों से परेशान और पीड़ित है। राजधानी की सभी छोटी-बड़ी दुकानें रात 8 बजे ही इस डर से बंद हो जाती हैं कि कोई उन्हें लूट न ले और वास्तविकता में लोग लूटे भी जा रहे हैं। आए दिन राजधानी रांची व अन्य जिला में हत्या, अपहरण, जबरन वसूली, पेट्रोल पंप डकैती और मॉल में डकैती करके अपराधी आराम से निकल जा रहे हैं।

इसे भी पढ़ें : रांची : रामनवमी को लेकर राजधानी में पुलिस अलर्ट पर, तपोवन मंदिर समेत अन्य संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा कड़ी

अंबा प्रसाद ने कहा कि मान लेते हैं कि हत्या एक रैंडम घटना है जिस पर नियंत्रण कठिन हो सकता है, लेकिन जो संगठित अपराध हैं, जैसे डकैती, ट्रैफिकिंग, लूट, ब्राउन शुगर या ड्रग्स माफिया गिरी, वेश्यावृत्ति, जबरन वसूली और जेल से संचालित संगठित अपराध, इन्हें तो पुलिस चाहे तो बिल्कुल रोक सकती है। सच तो यह है कि अधिकतर अपराध पुलिस के संरक्षण में ही चल रहे हैं। यहाँ का अपराधी फर्जी पासपोर्ट बनाकर अजरबैजान, फ्रांस और इंग्लैंड चला जा रहा है और पुलिस पूरी तरह विफल हो गई है। ड्रग्स का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है, यहाँ तक कि जेल से भी अपराध संगठित हो रहा है।

क्राइम डेटा से पता चलता है कि सबसे ज्यादा हत्याएं पहले गुमला में होती थीं, जो अब रांची में ज्यादा होने लगी हैं। साइबर अपराध जैसे विषयों के लिए हमें जामताड़ा से विश्वव्यापी कुख्याति मिली है। धनबाद को तो छोड़ ही दीजिए, इस पर तो दो-तीन फिल्में ही बन गई हैं। यह हमारे पिछले 25 सालों के ‘बबुआ झारखंड’ की छवि है और हमारे पुलिस मंत्री तथा पुलिस की काबिलियत का भी प्रमाण है।

भाड़े पर चल रहे हैं डीजीपी

डीजीपी भी भाड़े पर चल रहे हैं, जिन्हें रिटायरमेंट के बाद भी बहाल किया गया है। डीजीपी तदाशा मिश्रा की कार्यशैली देखकर मुझे लगता है कि जनता के लिए उनका सही नाम ‘हताशा मिश्रा’ होना चाहिए था। यही पुलिस ‘सुपर कॉप’ बनकर एक निहत्थे बुजुर्ग रैयत का घर तोड़ने के लिए सायरन बजाते हुए 100 से ज्यादा गाड़ियों के साथ हाजिर होती है, वह भी एनटीपीसी का पल्लू पकड़कर। ऐसी ’12 बजी हुई’ पुलिस का डायल नंबर 112 न होकर सिर्फ 12 होना चाहिए था। यह सब देखकर मुझे लगता है कि पुलिस मंत्रालय को भी एनटीपीसी को ही दे देना चाहिए। सरकार के पास पुलिस मंत्रालय रहे या न रहे, चाहे वह एनटीपीसी के पास ही क्यों न रहे, जनता का हाल एक ही रहेगा।

‘जल, जंगल, जमीन’ नहीं ‘जंगल राज’

संविधान में हमने पढ़ा था कि सरकार एक स्वतंत्र सत्ता होती है, परंतु वर्तमान वास्तविकता यह है कि यह ‘स्पॉन्सर्ड स्वतंत्रता’ की तरफ बढ़ रही है। जो सरकार को स्पॉन्सर करे, सरकार उसी की हो जाती है। क्या हम ‘जल, जंगल, जमीन’ का नारा लगाकर ‘जंगल राज’ की प्रतिष्ठा करना चाह रहे हैं? हम सुन रहे हैं कि झारखंड उग्रवाद से मुक्त हुआ, पर देख रहे हैं कि यह उपद्रवियों से भर गया है। जगह-जगह पोस्टर दिखते हैं—”उग्रवाद मुक्त झारखंड में आपका स्वागत है”; वहाँ लिख देना चाहिए—”उपद्रव युक्त झारखंड में आपका स्वागत है”। पुलिस एक गिरोह को ऊपर उठाने के लिए दूसरे गिरोह को सुपारी लेकर मार रही है। इसके लिए उन्हें पैसा भी मिला और मेडल भी मिला; रक्षक ही भक्षक बन गया है।

फर्ज करिए कि कोई भूत आपकी तरफ आ रहा है और वह भी हनुमान चालीसा पढ़ते हुए, तो आप उस बला से बचने के लिए क्या पढ़ेंगे? यहाँ तो सभी भूत ही हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं, ऐसे में लोग क्या करें? पहले 100 नंबर पर 100 बार फोन करने पर भी फोन नहीं उठता था, अब आपको 112 पर 112 बार फोन करना पड़ेगा तब भी नहीं उठाएगा। परिणाम वही है—पहले भी नतीजा शून्य था और अभी भी शून्य ही रहेगा। मुझे लगता है कि आगे का ‘एक’ मिटा देना चाहिए और डायल नंबर केवल 12 होना चाहिए क्योंकि पुलिस की तो खुद 12 बज चुकी है। अगर किसी को अपना 12 बजवाना हो, तो इन्हें डायल कर लीजिए।

बिजली गुल और मीटर चालू वाली व्यवस्था नहीं चलेगी। झारखंड पुलिस का रिमोट कंट्रोल झारखंड सरकार के पास है पर बैटरी अमित शाह लेकर चले गए हैं, अब ऐसे में सरकार क्या करे! झारखंड पुलिस की नई सवारी के बदन पर लिखा है—’आपकी सुरक्षा, हमारी जिम्मेदारी’। मेरा एक सवाल है कि यह ‘आप’ है कौन? वह नागरिक तो बिल्कुल नहीं है। यदि नागरिक होता, तो लिखा जाता: ‘नागरिक सुरक्षा, हमारी जिम्मेदारी’।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर