नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है. इसके लिए उन्होंने कुछ रास्ते भी बताए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना के सिकंदराबाद में देशवासियों से सोना न ख़रीदने, विदेश यात्रा कम करने, पेट्रोल कम इस्तेमाल करने और वर्क फ्रॉम होम की अपील की थी.
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी मुद्रा बचाने की अपील के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हमें इसे मानना चाहिए. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हम उन चीज़ों पर खर्च कम कर सकते हैं जिनमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है.
अश्विनी वैष्णव ने एक कार्यक्रम में कहा, “युद्ध अभी भी जारी है और कल की घटनाओं से स्पष्ट है कि समझौता अभी दूर है. प्रधानमंत्री ने हमसे कहा है कि हम उन चीज़ों पर खर्च कम कर सकते हैं, जिनमें विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है.” “हमें विदेशी मुद्रा बचानी भी होगी और ज़्यादा से ज़्यादा विदेशी मुद्रा कमानी भी होगी. दोनों काम साथ-साथ चलने चाहिए.”
उन्होंने कहा, “मैं आप सबसे अनुरोध करता हूं कि प्रधानमंत्री की अपील को ध्यान में रखें और अपनी क्षमता और कारोबार के हिसाब से जो सबसे अच्छा कर सकते हैं, वह करें.”
दूसरी ओर, विपक्ष के नेताओं ने पीएम मोदी की इस अपील की आलोचना की है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि ये नाकामी का सबूत है, अब जनता को यह बताना पड़ रहा कि क्या ख़रीदें और क्या नहीं.
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख और अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव ख़त्म होते ही संकट याद आ गया. अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट में लिखा, “सोना न ख़रीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख रुपए तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है. भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं.”
उन्होंने लिखा, “वैसे सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं हैं? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं कीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियां जनता के लिए ही हैं क्या?”
अखिलेश यादव ने लिखा, “इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी. सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं.”
गौरतलब है कि ईरान-अमेरिका की तनातनी के बीच पीएम मोदी की ओर से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील रविवार को तेलंगाना के सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में की गई.
केजरीवाल ने की आलोचना
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अर्थव्यवस्था को लेकर पीएम मोदी की अपील पर सवाल खड़े किए हैं. सोशल मीडिया एक्स पर केजरीवाल ने लिखा, ”प्रधानमंत्री ने देश के सभी नागरिकों को सलाह दी है कि वे खाने-पीने, यात्रा और सैर-सपाटे पर होने वाले ख़र्च में कटौती करें, यहाँ तक कि सोने और अन्य कीमती चीज़ों की ख़रीद में भी कमी लाएँ.”
केजरीवाल ने सवाल किया, ”क्या यह आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फँस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ. प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए कि आख़िर, देश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है?”
सचिन पायलट ने कहा
आम लोगों से पीएम मोदी की अपील पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने प्रतिक्रिया दी है. सचिन पायलट ने कहा, “ये सारी बातें प्रधानमंत्री बहुत ही लापरवाही से एक जनसभा में कह रहे हैं. मुझे लगता है पूरी जनता और संसद को विश्वास में लिया जाना चाहिए कि असल में क्या हुआ. खाड़ी युद्ध को लेकर असल में हमारा क्या रुख़ है, उसके बारे में बताना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, ”चुनाव ख़त्म हो गए हैं तो अब कीमतें बढ़ रही हैं. लेकिन ये बचत करना, सोना नहीं ख़रीदना, वर्क फ्रॉम होम करना…कैजुअली ये सलाह नहीं दे सकते हैं. उन्हें आंकड़ों के साथ बताना पड़ेगा कि तथ्य क्या है, हक़ीक़त क्या है.” सचिन पायलट ने कहा, ”अगर ये सब करना था तो अचानक ऐसा क्या हुआ, क्योंकि युद्ध तो दो महीनों से चल रहा है और अब तेल की कीमतें भी स्थिर हैं. क्या हमें पूरी जानकारी है? क्या कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही है. सच्चाई सबके सामने आनी चाहिए.”


