Thursday, July 23, 2026

7.5 लाख का कर्ज लेकर बुक किया गया था एयर एंबुलेंस, होटल में लगी आग में झुलस गए थे संजय

रांची : चतरा के सिमरिया में सोमवार शाम हुए एयर एंबुलेंस विमान हादसे में जान गंवाने वाले चंदवा निवासी संजय प्रसाद की मौत नियति की क्रूर विडंबना साबित हुई है। कुछ दिन पहले उनके होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी, इस हादसे में उनका होटल तो जला ही, सजय भी लगभग 65 प्रतिशत झुलस गए थे। संजय कुमार के परिवार ने उनके इलाज के लिए लाखों रुपये उधार लिए थे और उसी पैसे से एयर एम्बुलेंस बुक की थी। परिवार चाहता था कि उनका इलाज दिल्ली के बड़े अस्पताल में हो, लेकिन उनको क्या पता था कि एक जिंदगी बचाने की यह यात्रा सात लोगों की मौत में तब्दील हो जाएगी।

16 फरवरी को झुलस गए थे संजय

संजय की हालत सड़क मार्ग से यात्रा करने लायक नहीं थी, इसलिए उनके परिवार ने रिश्तेदारों से संपर्क किया और एयर एम्बुलेंस के लिए 7.5 लाख रुपये उधार लिए। दिल्ली में उनके इलाज के लिए भी कुछ पैसे अलग रखे गए थे। मिली जानकारी के अनुसार, 16 फरवरी को लातेहार जिले के सतबरवा थाना क्षेत्र अंतर्गत करियाडीह में एनएच-39 किनारे स्थित संजय प्रसाद का लाइन होटल सह आवास अचानक आग की चपेट में आ गया था, जो लंबे समय से बंद पड़ा था। इस दौरान आग लगने से संजय प्रसाद झुलस गए थे। उन्हें तत्काल रांची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया।

दुर्घटना का शिकार हुआ एयर एम्बुलेंस

इसके बाद सोमवार शाम को रेडबर्ड के एयर एम्बुलेंस से उन्हें दिल्ली ले जाया जा रहा था, लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में ही विमान दुर्घटना का शिकार हो गया। इस हादसे में साथ जा रही उनकी पत्नी अर्चना की भी मौत हो गई। संजय के बड़े भाई विजय शॉ उन्हें रांची हवाई अड्डे पर छोड़ने गए थे। उन्होंने कहा, “हम अभी घर पहुंचे ही थे कि टीवी समाचारों से हमें दुर्घटना की खबर मिली। पल भर में सब कुछ खत्म हो गया।” दुर्घटना में संजय और उनकी पत्नी अर्चना दोनों की मृत्यु होने के कारण उनके दोनों बच्चे अनाथ हो गए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर रांची में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं होतीं, तो संजय को एयरलिफ्ट करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर