रांची: जेपी केंद्रीय कारा हजारीबाग से 30-31 दिसंबर की रात में उम्रकैद के सजायाफ्ता तीन कैदियों के रस्सी के सहारे दीवार फांदकर भागने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। जेल सुरक्षा में गंभीर चूक के आरोप में आईजी जेल सुदर्शन मंडल ने दो हेड वार्डन उमेश सिंह और हरेंद्र महतो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं इस मामले की जांच में एसआईटी फरार कैदियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ जेल सुरक्षा में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों की पहचान में जुटी है।
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जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इधर, मामले में एसआईटी ने दबिश तेज कर दी है। हजारीबाग के एसपी के निर्देश पर गठित एसआईटी की पांच अलग-अलग टीमें धनबाद, रांची के अलावा बिहार के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। इधर कैदियों के फिल्मी अंदाज में फरार होने की घटना ने जेल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
28 जैप जवान कार्रवाई के दायरे में
फरार कैदी धनबाद जिले के निवासी हैं। इस सनसनीखेज जेल ब्रेक ने पूरे प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। जेल प्रशासन भी शक के दायरे में है। पूरे प्रकरण में 28 जैप जवान कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं। जेल सूत्रों के अनुसार घटना वाले दिन जेल की 13 गुमटियों पर जैप (झारखंड आर्म्ड पुलिस) के मात्र 28 जवान तैनात थे, जबकि सामान्य दिनों में तीन शिफ्ट में 65 जवानों की ड्यूटी होती है। सुरक्षा में लापरवाही सामने आने पर इन 28 जवानों को कार्रवाई के दायरे में लाया गया है।
लोयाबाद थाना क्षेत्र में छापेमारी
हजारीबाग सेंट्रल जेल से फरार कुख्यात कैदी देवा समेत दो अन्य बंदियों की तलाश में हजारीबाग पुलिस ने गुरुवार को लोयाबाद थाना क्षेत्र के सेन्द्रा 10 नंबर स्थित देवा के घर पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के लिए पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि छापेमारी के बाद देवा के कुछ रिश्तेदार गांव छोड़कर फरार हो गए हैं। गौरतलब है कि देवा इससे पहले भी धनबाद मंडल कारा से फरार हो चुका है और लगभग तीन वर्षों तक पुलिस को चकमा देता रहा था। बाद में लोयाबाद के सेन्द्रा स्थित उसके घर से ही गिरफ्तार किया था।
लाल टोपी की क्या है कहानी?
हजारीबाग सेंट्रल जेल से भागने वाले 3 कैदियों में से एक देवा इससे पहले धनबाद जेल से भी भाग चुका था. जेल नियमों के अनुसार जेल से भाग चुके कैदियों की पहचान के लिए उसके सिर पर लाल टोपी पहनायी जाती है. साथ ही उसे अलग सेल में रखे जाने का भी प्रावधान है, लेकिन देवा के साथ यह व्यवस्था हजारीबाग जेल में नहीं अपनाई गई। कैदी की लाल टोपी हटा कर उसे जेल में सामान्य वार्ड में ही रखा गया. ऐसे में अब एसआईटी इस तथ्य की जांच कर रही है कि आखिर किसके कहने पर देवा से लाल टोपी हटाई गई थी.
हजारीबाग सेंट्रल जेल से 30 दिसंबर की रात तीन कैदी भागे थे. भागने वाले कैदियों मे देवा भुईयां, जीतेंद्र रवानी और राहुल रजवार का नाम शामिल है. तीनों कैदियों को POCSO Act के तहत सजा सुनायी जा चुकी है. तीनों कैदियों को धनबाद जेल से हजारीबाग सेंट्र्ल जेल लाया गया था. हजारीबाग सेंट्रल जेल से भागने वाले इन तीनों कैदियों में से देवा भुईया इससे पहले धनबाद जेल से भाग चुका है. वह धनबाद जेल से 2020 में भागा था. पकड़े जाने के बाद उसे फिर धनबाद जेल में रखा गया था. मार्च 2025 में इन तीनों कैदियों को धनबाद जेल से हजारीबाग सेंट्रल जेल लाया गया था.
जेल से भाग चुके कैदियों पर नजर रखने और पहचानने के लिए सिर पर लाल टोपी पहनाये जाने का नियम है. साथ ही इस तरह के कैदियों को सेल में रखने का प्रावधान है. हजारीबाग सेंट्रल जेल में इस नियम का पालन करते हुए देवा भुईयां को लाल टोपी पहनायी गयी थी और सेल में रखा गया था. लेकिन कुछ दिनों बाद सुनियोजित साजिश के तहत उसके सिर से लाल टोपी हटा दी गयी थी. साथ ही उसे सेल के बदले सामान्य वार्ड में रखा गया था.
बताया जाता है कि जेल के कर्मचारियों ने साजिश रच कर उसे भी जीतेंद्र रवानी और राहुल रजवार के साथ सेक्टर-6 के वार्ड नंबर चार में रखा था. जेल से भागने के मामले में जारी जांच के दौरान जांच दल को देवा भुईंया के सिर से लाल टोपी हटाने और सेल के बदले सामान्य वार्ड में रखने में शामिल कर्मचारियों की तलाश है. हालांकि अब तक की जांच के दौरान यह पता नहीं लगाया जा सका है कि किसके आदेश पर उसके सिर से लाल टोपी हटायी गयी.
जेल से भागने की इस घटना के सिलसिले में मुख्यालय को भेजी गयी सूचना के अनुसार पहले वार्ड के खिड़की की छड़ काटी गयी. खिड़की की छड़ काटने के बाद तीनों कैदी वार्ड से बाहर निकले. वार्ड से बाहर निकलने के बाद आंतरिक दीवार को पार कर जेल की बाहरी दीवार के पास पहुंचे. बाहरी दीवार पर जेल के बाहरी हिस्से से किसी ने रस्सी अंदर फेंकी. इसके बाद तीनो कैदी उसी रस्सी के सहारे जेल की बाहरी दीवार पार कर भागने में कामयाब हुए.
वार्ड की खिड़की की छड़ काटने और जेल से बाहर भागने में किन लोगों ने मदद की. फिलहाल इसका पता लगाया जा रहा है. हालांकि अब तक जेल से भागने की इस घटना में शामिल कर्मचारियों और बाहरी लोगों का पता नहीं लगाया जा सका है. जेल प्रशासन ने भागने की इस घटना में कार्रवाई करते हुए सिर्फ उन कर्मचारियों को निलंबन किया है जिनकी ड्यूटी उस क्षेत्र में थी.


