रांची: झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। धनबाद रिंग रोड निर्माण के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले की परतें अब आधिकारिक तौर पर खुलनी शुरू हो गई हैं। एसीबी ने इस मामले में तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (DLAO) उदयकांत पाठक और कानूनगो मिथिलेश कुमार सहित 17 मुख्य आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है।
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला साल 2016 का है, जब धनबाद के विकास के लिए ‘रिंग रोड’ का खाका खींचा गया था। सड़क निर्माण के लिए मौजा-धनबाद, मनईटांड़ और दुहाटांड़ में जमीन का अधिग्रहण किया जाना था। विकास की इस योजना की आड़ में भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर लूट का ऐसा जाल बुना कि सरकारी खजाना खाली होता गया और मुआवजे की राशि उन लोगों की जेबों में चली गई, जिनका जमीन से कोई लेना-देना ही नहीं था। आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों ने अपने पद की गरिमा को ताक पर रखकर बिना किसी उचित सत्यापन के, फर्जी डीड धारकों और बिचौलियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये का बंदरबांट किया।
एसीबी की चार्जशीट में इन अधिकारियों का नाम
एसीबी की चार्जशीट में सरकारी अमले से लेकर बिचौलियों तक की पूरी लिस्ट शामिल है:
उदयकांत पाठक: तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, धनबाद
मिथिलेश कुमार: तत्कालीन कानूनगो, जिला भू-अर्जन कार्यालय, धनबाद
विशाल कुमार: तत्कालीन अंचलाधिकारी धनबाद
अनुपमा कुमारी: तत्कालीन निम्नवर्गीय लिपिक
शंकर प्रसाद दूबे: तत्कालीन अमीन
रविन्द्र कुमार एवं उमेश महतो: तत्कालीन दैनिक वेतन भोगी अमीन
रामकृपाल गोस्वामी: चेयरमैन, लखियाबाद तेतुलिया पैक्स
काली प्रसाद सिंह: प्रबंधक, गंडुवा पैक्स
इनके अलावा घोटाले के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले बिचौलिये और फर्जी डीड धारक आलोक बरियार उर्फ जैकी लाला, सुमेश्वर शर्मा, सुशील प्रसाद, दिलीप गोप, कुमारी रत्नाकर, बप्पी राय चौधरी, अशोक कुमार महथा और अनिल कुमार सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया गया है।
बिचौलियों और फर्जीवाड़े का नेक्सस
एसीबी की जांच में यह साफ हुआ है कि यह घोटाला सिर्फ फाइलों की गलती नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। इसमें असली जमीन मालिकों को दरकिनार कर फर्जी डीड तैयार की गई। अंचल कार्यालय से लेकर भू-अर्जन कार्यालय तक के अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं। जैकी लाला जैसे बिचौलियों ने सरकारी तंत्र और फर्जी दावेदारों के बीच सेतु का काम किया।
अब आगे क्या?
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इन सभी आरोपियों पर कानूनी शिकंजा और कड़ा होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही राजस्व को हुई इस भारी क्षति की वसूली और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी।
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