Lifestyle Desk: अगर आपको लगता है कि सिगरेट नहीं पीते तो फेफड़ों का कैंसर नहीं होगा, तो यह खबर आपके लिए है. नई रिसर्च में सामने आया है कि जो लोग कभी धूम्रपान नहीं करते, उनमें भी यह बीमारी देखी जा रही है. यानी खतरा सिर्फ स्मोकिंग तक सीमित नहीं है. रिसर्च कहती है कि फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने के और भी कारण होते हैं. ये धीरे-धीरे असर करते हैं और बाद में बड़ी बीमारी बन सकते हैं. इसलिए सिर्फ धूम्रपान से दूर रहना ही पूरी सुरक्षा नहीं देता.
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5 में 1 मरीज नॉन-स्मोकर
33 लाख से ज्यादा लोगों के डाटा पर हुई इस स्टडी में पता चला कि फेफड़ों के कैंसर के करीब 20 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी. यानी हर 5 में से 1 मरीज नॉन-स्मोकर हो सकता है.
इसमें एक खास जीन बदलाव सामने आया, जिसे EGFR म्यूटेशन कहा जाता है. यह बदलाव होने पर कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ सकता है.
शरीर का बदलाव भी जिम्मेदार
रिसर्च में बताया गया कि कुछ लोगों के शरीर में जीन अपने आप बदल जाते हैं. इससे कोशिकाएं तेजी से और गलत तरीके से बढ़ने लगती हैं. इसी वजह से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
इसके अलावा, दो जीन के जुड़ने से बनने वाले प्रोटीन भी कैंसर कोशिकाओं को बढ़ावा दे सकते हैं.
बदल सकता है जांच का तरीका
अब तक डॉक्टर ज्यादातर इस बात पर ध्यान देते थे कि कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है या नहीं. लेकिन अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि आगे चलकर जीन की जांच भी जरूरी हो सकती है. इससे ऐसे लोगों की पहचान हो सकेगी जिन्हें पहले खतरे में नहीं माना जाता था. यह साफ है कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ सिगरेट से नहीं होता. शरीर के अंदर होने वाले बदलाव भी बड़ा कारण बन सकते हैं. इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर जांच कराते रहें.


